जीवन में आधे खाली ग्लास को पूरा कैसे भरें, यही सकारात्मकता ही आपको पीएससी परीक्षा में सफलता दिलाती है – देवेश साहू
संस्था युवा के संडे स्पेशल क्लास में इस बार के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता अभी हॉल ही में घोषित सीजीपीएससी परिणामों में प्रथम रैंक हासिल करने वाले श्री देवेश साहू थे।
मुख्य अतिथि के आसंदी से बोलते हुए श्री देवेश साहू ने सबसे पहले अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए बताया कि उनका गृहग्राम दुर्ग जिले में स्थित है। उनके दादाजी किसान थे और पिता भिलाई इलेक्ट्रिशियन की नौकरी करते थे और मां गृहणी थी, इतनी साधारण पृष्ठभूमि के होने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से सीजीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की है, उन्होंने कहा कि संस्था युवा में पढ़ने वाले अधिकांश निम्न मध्यम वर्ग से आते हैं, लेकिन उन्हें अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि को अपने सफलता का रोड़ा नहीं मानना चाहिए। उन्होंने इस बात को उदाहरण के साथ समझाया कि इस वर्ष परीक्षा में उनके साथ सफल हुए प्रतिभागियों में से एक के पिता हाट बाजार में सब्जी बेचने का काम करते थे और अन्य की माताजी घरों में खाना बनाने का काम करती थी, लेकिन इन्होंने घर की आर्थिक तंगी को भी अपनी दृढ़ निश्चित में बदला। उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक छात्र के जीवन में सुविधाएं होती हैं तो बाधाएं भी होती है, इसीलिए यह उस छात्र पर निर्भर करता है कि वह इनमें से किनका चयन करता है और प्रायः असफल छात्र अपने जीवन के बाधाओं का ही रोना रोते रह जातें हैं।
श्री देवेश साहू ने उपस्थित छात्रों से कहा कि सीजीपीएससी की तैयारी के लिए अभ्यर्थियों में सकारात्मक मानसिकता की आवश्यकता सर्वाधिक आवश्यकता होती है, उन्होंने ग्लास में आधे भरे और आधे खाली वाले उदाहरण से समझाया कि अब समय आ गया ही कि हम सिर्फ आधे भरे ग्लास की ही न सोचें बल्कि बचे हुए आधी ग्लास को भी किस तरह भरें, ऐसी मानसिकता बनानी होगी।
उन्होंने संत कबीरदास जी की वाणी “धीरे धीरे मना, धीरे धीरे होय” से सीख लेते हुए छात्रों को धैर्य को बनाए रखने की सीख दी, उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 से ही अपनी तैयारी शुरू की, कई बार मेंस क्वालीफाई किया, कई बार इंटरव्यू दिया, लेकिन रैंक पीछे हो जाने के कारण उनका चयन नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया और अंततः टॉपर बनकर सफलता हासिल की।
उन्होंने कहा कि सीजीपीएससी में मेंस में “दर्शनशास्त्र” विषय पर एक प्रश्न पत्र होता है, लेकिन उन्होंने छात्रों से कहा कि सिर्फ एक विषय के नाते इस की तैयारी न करें, बल्कि इस विषय को ही अपने जीवन में उतार लें। उन्होंने कहा कि भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण सभी मनुष्यों को”स्थिरप्रज्ञ” होने की कहतें हैं और वास्तव में ऐसा बनना साधारण मनुष्यों के लिए असंभव है, लेकिन फिर भी सभी छात्रों को अपने अंदर इस गुण को समाहित करना चाहिए। श्री देवेश साहू ने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले वर्ष का रिजल्ट 28 नवंबर को जारी हुआ था, जिसमें उनका चयन नहीं हुआ और संजोग से अगले ही दिन यानी 29 नवंबर को ही उनका जन्मदिन था, इसके बावजूद उन्होंने बगैर आंसू बहाए इस वर्ष की परीक्षा तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि अधिकांश छात्र, अपनी असफलता से उबरने में इतना समय लगा देतें हैं, जिसके कारण उनके अगली परीक्षा में सफल होने में संकट खड़ा हो जाता है।
इसके बाद उन्होंने सीजीपीएससी परीक्षा के तैयारी के स्ट्रैटजी के बारे में बताते हुए कहा कि छात्रों को प्रश्न पत्र के कठिनाइयों को देखकर घबराना नहीं चाहिए क्योंकि अगर प्रश्नपत्र का स्तर कठिन है तो फिर सबके लिए कठिन है। इसे उदाहरण के माध्यम से समझाया कि पूर्व में पीएससी टॉपरों के मार्क्स 1100 के आसपास होते थे लेकिन अब घटकर 700 के आस पास रह गए हैं, इससे छात्रों को यह बात समझनी चाहिए कि कठिन प्रश्न पूछे जाने पर कम मार्क्स लाकर सफल हुआ जा सकता है।
उन्होंने अपने सफलता के लिए अपने परिवार और गुरुजनों को श्रेय दिया है। उनका कहना था कि उनकी माताजी ने सिर्फ दसवीं तक की ही पढ़ाई की है, लेकिन उनके तैयारी में उनके माताजी ने उनसे तीन गुना ज्यादा मेहनत किया है। उनके माता जी, उनके उठने से पूर्व उठ जाना और उनके सोने के बाद ही सोने जाती थी। उन्होंने बिलासपुर में एक साल के कोचिंग के बाद घर पर ही रहकर तैयारी की, इसलिए उनके खाने पीने से लेकर हर एक छोटी सी चीजों का ख्याल उनकी माता जी रखतीं थीं।
उन्होंने कहा कि सीजीपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सर्वाधिक फोकस प्रथम, द्वितीय और चतुर्थ प्रश्न पत्र पर देना चाहिए क्योंकि इन प्रश्न पत्रों में आपके द्वारा अर्जित किए अंकों से आपका रैंक तय हो जाता है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान किसी भी अभ्यर्थी द्वारा तीन तरीके की गलती होती है- पहली जो जल्दबाजी या अपनी मूर्खतापूर्ण तरीके में की गई, दूसरी जो अभ्यास की कमी से होती है और तीसरी आपके ज्ञान की कमी से हो सकती है। पहले तरीके के गलतियों से निपटने के लिए आपको गंभीरता से प्रश्नों को हल करने चाहिए, दूसरी के लिए आपको रिवीजन और पिछले वर्ष पूछे गए प्रश्नों को हल करके और तीसरे के लिए आपको निरंतर पढ़ते हुए अपने ज्ञान को बढ़ाना है।
श्री देवेश साहू ने कहा कि राज्य स्तरीय व्यापम परीक्षाओं में सफल होने के लिए आवश्यक होता है यदि आपने गणित और अंग्रेजी विषय पर आपकी कितनी महारत है और व्यापम के लिए की गई इन्हीं विषयों की तैयारी से आपको पीएससी के मेंस परीक्षा में सफलता गारंटी दिलाती है।
छात्रों द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद भी अपने तैयारी के लिए एआई टूल्स का सहारा लिया और कम समय में किसी भी विषय के तथ्यात्मक जानकारी के लिए यह अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।
उन्होंने गणित विषय के तैयारी के लिए आर एस अग्रवाल की पुस्तक, हिंदी विषय के लिए विनय पाठक के लिए वासुदेव नंदन की पुस्तक और सामयिक घटनाचक्र (करेंट अफेयर्स) की तैयारी के लिए प्रसार भारती की “न्यूज ऑन एयर” एप को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने अपने इंटरव्यू के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने अन्य अभ्यर्थियों के विपरीत कोट पैंट के बजाय शर्ट पैंट पहना था, जिस पर उन्होंने कहा कि इस पहनावे में ही वे अपने को सहज पाते हैं, उनके इस सफगोई की इंटरव्यू पैनल ने तारीफ भी की।
अंत में संस्था के ओर से श्री चंद्र प्रकाश साहू ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

