रायपुर(22.11.22) राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के ई-सेल ने 19 नवंबर, 2022 को एक बिजनेस मॉडल वर्कशॉप और 20 नवंबर, 2022 को एक डिजिटल मार्केटिंग वर्कशॉप का आयोजन एनआईटी रायपुर के ई-हॉल में किया। वर्कशॉप का उद्देश्य उपस्थित सदस्यों को आधुनिक बाजार में उपस्थित विभिन्न व्यवसाय मॉडल के बारे में अवगत करवाना और उन्हें उद्यमिता और डिजिटल मार्केटिंग की कला से परिचित कराना था।
वर्कशॉप के पहले दिन वक्ता छत्तीसगढ़ समिति के पीएचडी चेंबर के कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेंद्र पाण्डेय थे और दूसरे दिन के अतिथि वक्ता बिग बाजार के मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव, ओप्पो के डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर और डिजिटल सूमो के निदेशक श्री वैभव सूर्यवंशी थे। वर्कशॉप का संचालन एनआईटी रायपुर के ई-सेल के संकाय प्रभारी डॉ. चंद्रकांत ठाकुर की मार्गदर्शन में किया गया।
पहले दिन श्री ज्ञानेंद्र पांडेय ने स्टार्ट-अप्स और उद्यमिता के बीच गंभीर रूप से अंतर करते हुए तथा उद्यमिता की कला पर चर्चा करते हुए वर्कशॉप की शुरुआत की। उसके बाद उन्होंने समय से पहले योजना बनाने के महत्व का विश्लेषण किया और विचार-मंथन, समानांतर सोच, अव्यक्त मांग और लक्षित दर्शकों की पहचान जैसी तकनीकों का वर्णन किया और “थिंक ग्लोबल, एक्ट लोकल” मानसिकता की कमी के बारे में विस्तार से बताया। फिर उन्होंने व्यवसाय मॉडल के विभिन्न प्रकारों की व्याख्या करते हुए उसे परिभाषित किया। इसके बाद, उन्होंने- एस.डब्लु.ओ.टी ( स्ट्रेंथ, वीकनेस, अपॉर्चुनिटी एंड थ्रेट्स) विश्लेषण और विचार-मंथन के लिए पी. पी. पी (पेन, पैशन एंड प्राउड ) मॉडल के बारे में सूचित किया। उन्होंने उपस्थित लोगों से उनके व्यावसायिक विचारों को साझा करने के लिए कहा और उनके व्यवसाय मॉडल पर चर्चा करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया। एक फीडबैक फॉर्म के प्रसार के साथ यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
दूसरे दिन, श्री वैभव सूर्यवंशी ने छात्रों को पारंपरिक से डिजिटल मार्केटिंग के विकास के बारे में जानकारी देकर वर्कशॉप की शुरुआत की। इसके पश्चात उन्होंने एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी द्वारा प्रदान की जाने वाली वेब या ऐप डेवलपमेंट, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन, ग्राफिक और लोगो डिजाइन, वीडियो एडिटिंग, वेब पीआर सेवाओं सहित विभिन्न सेवाओं का विस्तृत विवरण दिया। श्री वैभव ने विभिन्न व्यवसायों के लिए सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन और खोजशब्दों का उपयोग करने के वास्तविक समय के परिणामों को चित्रित किया। उसके बाद उन्होंने व्यवसायों के लिए कई ग्राफिक दृश्य प्रस्तुत किए जो उनकी संस्थान ने भाषा, शैलियों और प्राथमिक मनोविज्ञान पर जोर देते हुए बनाए थे। उन्होंने इन्फ्लुएंसर और एफिलिएट मार्केटिंग के बारे में भी जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने रीयल-एस्टेट के उदाहरण के साथ एक इंप्रोमेप्टू इंटरएक्टिव सत्र आयोजित किया, जिसमें व्यवसाय की डिजिटल उपस्थिति के बारे में जानकारी दी गई। प्रश्नोत्तर सत्र के साथ दो दिवसीय वर्कशॉप का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

