आरंग:- क्षेत्र के किसान नेता पारसनाथ साहू ने केंद्र सरकार से गैर बासमती चावल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाने की मांग किया है।उन्होंने कहा कि देश में चावल की कमी नही है बल्कि अधिकता होने के कारण स्टॉक में रखे चावल सड़ जाते हैं। 20 जुलाई को प्रतिबंध लगाने से पहले तक निर्यात जारी रहने के कारण भारत के किसानों को धान का अच्छा रेट में रहा था। 1300_ 1400 रुपए क्विंटल में बिकने वाला धान 2200 से ₹2500 तक प्रति क्विंटल खुले मार्केट में बिक रहा था।जिससे किसानों को फायदा हो रहा था चावल निर्यात पर प्रतिबंध लग जाने से धान के भाव फिर नीचे गिर रहा है, जिससे किसानों को काफी घाटा होगा आखिर केंद्र सरकार किसानों को घाटे में क्यों डूबाना चाहता है यह यक्ष प्रश्न है।ज्ञात हो कि भारतीय चावल का विदेशों में एक अच्छा मार्केट है मुख्य रूप से थाईलैंड इटली स्पेन अमेरिका में भारत से निर्यात किया जाता है। बिना किसी ठोस कारण के लगाए प्रतिबंध को भारत सरकार द्वारा खोले जाने की मांग किया है, ताकि भारतीय किसानों को उनके कड़ी मेहनत से उत्पादित अनाज का उचित कीमत मिल सके।