छत्तीसगढ़ रायपुर शिक्षा

एनआईटी रायपुर ने किया “स्पेस इन इंडिया” कार्यक्रम का आयोजन

Written by Tukeshwar Lodhi

रायपुर(18.12.22)- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर ने 16 दिसंबर 2022 को “स्पेस इन इंडिया” वक्ता सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम का आयोजन एनआईटी रायपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग एसोसिएशन (एमईए) द्वारा अपने फैक्लटी इंचार्ज, सूरज कुमार मुक्ति और मेकैनिकल इंजिनीरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर, मृदुल सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में किया गया।’इसरो की उत्पत्ति और विस्तार’ विषय पर आधारित इस कार्यक्रम के वक्ता यूआरएससी के डिप्टी डायरेक्टर (मैकेनिकल सिस्टम एरिया), डॉ. आलोक श्रीवास्तव थे। डॉ. आलोक श्रीवास्तव वर्तमान में इसरो द्वारा निर्मित सभी अंतरिक्ष यान के समीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। वे चंद्रयान -1 मिशन के लिए इसरो टीम अवार्ड से भी पुरस्कृत हैं। उन्होंने इनसैट-3दी और इनसैट-3दीआर के लिए परियोजना निदेशक के रूप में भी काम किया है। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आलोक श्रीवास्तव को मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष, डॉ. शुभाशीष सान्याल द्वारा पौधा भेंट करने के साथ स्वागत करके की गई।

सत्र के दौरान एनआईटी रायपुर के डीन (एकेडेमिक्स), डॉ. श्रीश वर्मा भी उपस्थित थे।डॉ. आलोक श्रीवास्तव ने अपने व्याख्यान की शुरुआत इस बात पर जोर देकर की कि कैसे गणित, ऊष्मा हस्तांतरण, रोबोटिक्स, सामग्री विश्लेषण आदि उपग्रहों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि 1963 से, इसरो ने लगभग 34 सुदूर संवेदन और संचार उपग्रहों का निर्माण किया है और जी.पी.एस नेविगेशन में आत्मनिर्भरता के लिए आईआरएनएसएस सिस्टम बनाया है। इसरो द्वारा एलएलआरआई चंद्र लेज़र रेंजिंग उपकरण भी विकसित किया गया था।उन्हें इस बात पर सबका ध्यान आकर्षित किया कि कैसे आर्यभट्ट सैटेलाइट के विकास से जीएसएलवी मार्क 3 और क्रायोजेनिक इंजन टेक्नलॉजी तक इसरो ने एक लंबा सफर तय किया है। सुदूर संवेदन उपग्रह भी इसरो द्वारा विकसित किए गए हैं। उन्होंने मार्स ऑर्बिटल मिशन के महत्व के बारे में भी बताया और यह भी की इसरो के लिए इसमें प्रथम प्रयास में सफल होना कितना अविश्वसनीय है। उन्होंने अंतरग्रहीय मिशनों में उपयोग किए जाने वाले अंतरिक्षयानों के सामने विभिन्न एटमोस्फियरिक कंडीशन्स के कारण आने वाली समस्याओं के बारे में सभी को बताया| उन्होंने इसरो के चार स्तंभों यानी मदद, समर्थन, सलाह और प्रतिक्रिया के बारे में बात की और कहा कि टीम वर्क ही संगठन की सफलता का कारण है। इसके बाद यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और इसमें छात्रों, कर्मचारियों और संकाय सदस्यों की भारी भागीदारी देखी गई।

About the author

Tukeshwar Lodhi