आरंग छत्तीसगढ़ शिक्षा

बड़ी खबर: “पीएम श्री स्कूल” के लिए आरंग के दो स्कूलों का चयन..शहरी से शासकीय अवंती बाई लोधी और ग्रामीण से भानसोज स्कूल का हुआ चयन..

Written by Tukeshwar Lodhi

आरंग(01.04.23)- केन्द्र सरकार ने देश के भविष्य यानी स्कूली बच्चों की बुनियाद को पहले से ज्यादा मजबूत बनाने की दिशा में एक बेहतर कदम उठाया है. सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में एक बड़ा बदलाव किया है. जिसके तहत देशभर में लगभग 14 हजार 500 स्कूलों को पीएम श्री योजना यानी (प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया) के तहत अपग्रेड किया जाएगा। इसके तहत आरंग विकासखंड के दो शासकीय स्कूलों का चयन हुआ है,जिसमे शहरी क्षेत्र में वार्ड नं.02 स्थित शासकीय वीरांगना अवंती बाई लोधी प्राथमिक विद्यालय और ग्रामीण क्षेत्र से शासकीय प्राथमिक विद्यालय भानसोज शामिल है।

◆आइये जानते हैं क्या है पीएम श्री स्कूल योजना◆

योजना प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम-एसएचआरआई) केन्द्र सरकार की एक ऐसी योजना है जिसमें देश के मौजूदा स्कूलों को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा. इस योजना से देश के अनुमानित 14 हजार 500 स्कूले जुड़ेंगे. प्रथम चरण में योजना को 5 सालों के लिए (2022-2027) लागू किया जाएगा। योजना का कुल अनुमानित बजट 27 हजार 360 करोड़ रुपये है. इस बजट में 18 हजार128 करोड़ की हिस्सेदारी केन्द्र सरकार की होगी. वहीं, इससे 18 लाख से ज्यादा छात्रों को फायदा होगा. योजना में सरकारी स्कूल शामिल किए जाएंगे. सभी का चयन राज्यों के साथ मिलकर होगा.

◆बदलेगा स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर◆

पीएम श्री योजना के तहत सरकारी स्कूलों को इंफ्रास्ट्रक्चर बदेलगा. स्कूलों को पूरी तरह से मॉर्डन बनाया जाएगा. बिल्डिंग अपग्रेड की जाएगी, क्लॉसरूम स्मॉर्ट होंगे, कंप्यूटर लैब से लेकर लैबोरेटरी, लाइब्रेरी को टेक फ्रेंडली बनाया जाएगा. NEP के तहत प्ले स्कूल तैयार किए जाएंगे. इन स्कूलों में क्लास 3 से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई कराई जाएगी.

◆बदलेगा पढ़ने-पढ़ाने का तरीका◆

पीएम श्री योजना के तहत स्कूल के साथ पढ़ने-पढ़ाने के तरीकों में बदलाव किया जाएगा. एक्सपेरिमेंटल, ट्रांसफॉर्मेशनल और होलिस्टिक यानी ऑलराउंड डेवलपमेंट/ इंटीग्रेटेड मेथड पर ध्यान दिया जाएगा. साधारण शब्दों में कहा जाए तो स्कूलों में बच्चों को इस तरह से अध्ययन कराया जाएगा ताकि उन्हें नई-नई चीजें सीखने को मिले उनमें रिसर्च करने की क्षमता विकसित की जा सके. स्कूलों में डिस्कवरी ओरिएंटेड और लर्निंग सेंट्रिक टीचिंग मेथड लागू की जाएगी. खेल-खेल में सीखने और टॉय बेस्ड टीचिंग होगी. ताकि बच्चों को याद रखने के लिए रटना ना पड़े।

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