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श्रीमद भागवत कथा: आरंग के युवा धर्म की ओर हो रहे अग्रसर,भगवान की भक्ति के बिना कहीं भी शांति नही मिलती-पं.भारद्वाज जी

Written by Tukeshwar Lodhi

आरंग(11.12.22)- धर्मनगरी आरंग के ऐतिहासिक दशहरा मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पहले दिन बुलंदशहर से पहुंचे भागवताचार्य पंडित हिमांशु कृष्ण भारद्वाज जी ने श्रीमद् भागवत के महत्व को बताते हुए कहा कि भागवत कथा ही एकमात्र ऐसी कथा है जिसके अंदर जीवित व्यक्ति के साथ साथ मरे हुए व्यक्ति को भी मोक्ष प्रदान दिलाता है। महाराज जी ने भक्तों को श्रीमद् भागवत रूपी अमृत कथा का रसपान कराते हुए कहां की कोई भी व्यक्ति कितना भी पापी क्यों ना हो, जीवन भर कितने भी गलत कार्यों में लिप्त रहा हो, ऐसे व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात श्रीमद भागवत कथा सुन ले तो वह भी मुक्त हो जाता है।श्रीमद् भागवत कथा कल्पतरू है जिसकी शरण में बैठने पर हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।जो व्यक्ति जिस मनसा के साथ बैठता है उसकी सारी मनोकामनाएं वैसे ही पूर्ण होती हैं। लेकिन व्यक्ति की भावना पवित्र हो और संसार के मंगल की कामना उसके मन में हो ऐसे व्यक्ति की मनोकामना भागवत कथा से पूर्ण होती है।

आचार्य श्री भारद्वाज जीने श्रीमदभागवत कथा के महत्व को समझाते हुए आगे कहा कि भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है। आवश्यकता है निर्मल मन और स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की। भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य को परमानन्द की प्राप्ति होती है। भागवत कथा श्रवण करने से प्रेतयोनी को भी मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमदभागवत कथा सुननी चाहिए। भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य केे सम्पूर्ण कलेश दूर हो जाता है।

◆ आरंग के युवा धर्म की ओर हो रहे अग्रसर :

भगवताचार्य पंडित हिमांशु कृष्ण भारद्वाज जी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें जब लोग लेने जाते थे तो 40-50 साल उम्र के लोग लेने जाते थे लेकिन आरंग की पावन धरा पर मात्र 03 वर्ष से 16 वर्ष के बच्चे लेने के लिए पहुँचे।ये आरंग के युवाओं में धर्म के लिए समर्पण को दर्शाता है।

◆ जीव को तारती और कष्टों को दूर करती है श्रीमद् भागवत कथा :

पंडित हिमांशु कृष्ण भारद्वाज ने कथा पंडाल में उपस्थित धर्मप्रेमी जनता से कहा कि जीवन में कठिनाईयों का सामना हो तो उसे भगवान का प्रसाद मानकर धारण करना चाहिए। सुख और दुख कर्मो का फल है जो समयानुसार ही सब को प्राप्त होता है। एक प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि घास और बांस के बीजों का आकार एक जैसा है। दोनों को ही हवा-पानी, धूप एक बराबर दिया गया। किंतु घास तीव्र गति से बढ़ता गया, दूसरी ओर बांस के बीज में पौधे पांचवे वर्ष आया और वह छह माह के भीतर ही पूर्ण आकार ले लिया। कहने का आशय यह है कि जो प्राप्त करना है वह समय के अनुसार ही मिलेगा।

◆ आत्म देव और धुंधकारी की कथा को सुन भावविभोर हुए भक्त :

कथा में आगे व्यास मंच से भक्तों को धुंधकारी और आत्म देव की कथा का रसपान कराते हुए आचार्य श्री ने आगे बताया कि ईश्वर की भक्ति के लिए जीवन समर्पित करने वाले आत्मदेव के कोई संतान नहीं था। संतान न होने से क्षुब्ध होकर आत्म देव आत्महत्या करने वन चले गए वहां से एक गुरुदेव ने उन्हें फल दिया जिस के आशीर्वाद से धुंधकारी जैसा पुत्र उन्हें प्राप्त हुआ मगर वह भी बड़ा होकर दुराचारी व्यभिचारी गुस्से में आकर अनैतिक काम करने लगा। उधर आत्म देव के यहां एक गौमाता ने इंसान रूपी शिशु को जन्म दिया। सिर्फ उसके कान गौमाता की तरह थे। उसका नाम गौकरण रखा गया। दोनों शिशु बड़े होने लगे। संन्यासी के आशीर्वाद से उत्पन्न गौकर्ण ने तेजी से ज्ञान प्राप्त करना शुरू किया और उसमें दैवीय गुण विकसित होने लगे। इधर धुंधकारी उत्कट स्वभाव वाला निकला। उसमें विकृत गुणों का विकास होने लगा। आत्मदेव यह सब देखकर अत्यंत दुखी हो गए। वह दिन रात चिंता करते रहते। एक दिन गौकर्ण ने उन्हें चिंता में डूबे देखा तो पूछा कि वे किसे अपना मान रहे हैं। यह सब तो एक दिन नष्ट होना ही है।
आगे गोकर्ण जी महाराज धर्म की ध्वजा फहराने के लिए बाहर चले गए इधर घर में धुंधकारी के बढ़ते अत्याचार को देखते हुए आत्म देव भी घर से निकलकर भगवान की भक्ति में लीन हो गए और मोक्ष को प्राप्त हो गए। धुंधकारी की मां धुंधकारी से पीड़ित होकर कुएं में कूदकर अपनी जान दे दी। उसके बाद धुंधकारी व्यभिचार करते हुए वेश्यालय जाने लगा चोरी डकैती करने लगा जिस काम को नहीं करना चाहिए ऐसे कृत्य करते हुए आखिरकार धुंधकारी को भी मरना पड़ा। एक समय ऐसा आया जब धुंधकारी प्रेत योनि में अपने घर में ही भटक रहा था तभी उनका भाई गोकर्ण एक रात अपने घर पहुंचा तब अपने भाई धुंधकारी की प्रेत योनी से मुक्ति के लिए उन्होंने वहीं पर श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया जिससे धुंधकारी जैसे प्रेत की मुक्ति हो गई।

◆ मंच पर महाराज जी का परीक्षित और अतिथियों ने किया स्वागत:

श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के अंतिम समय में परीक्षित के रूप में कथा स्थल पर विराजित भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के संरक्षक वेदराम मनहरे, कथा स्थल पर पधारे भारतीय जनता पार्टी के संगठन मंत्री पवन साय, वरिष्ठ नेता अंंजय शुक्ला, के साथ भक्तों ने मंच में जाकर श्रीमद् भागवत महापुराण की विधिवत आरती पूजा अर्चना के साथ महाराज जी का स्वागत अभिनंदन किया। इस अवसर पर पवन साय जी संगठन महामंत्री छत्तीसगढ़ प्रदेश,
चंद्रशेखर साहू जी पूर्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, कृष्ण बिहारी जयसवाल जिला अध्यक्ष कोरिया, कन्हैया सिंह राठौर जिलाध्यक्ष पेंड्रा गौरेला मरवाही, घनश्याम सोनी जी महासमुंद, अंजय शुक्ला जी प्रदेश संयोजक बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, गोल्डी जी पूर्व जिलाध्यक्ष महासमुंद, नेतराम साहू, प्रशांत श्रीवास्तव, संतोष वर्मा, भाऊ राम साहू, राजेश नायक घनश्याम सोनी, धर्मेन्द्र जाधव,राकेश चंद्राकर तुमगांव नगर पंचायत अध्यक्ष , प्रकाश चंद्राकर पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका महासमुंद विशेष रूप से मौजूद रहे।

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