धर्म स्तंभ काउंसिल का आह्वान : प्रदेश के हर मठ-मंदिर में 28 दिसंबर को वेदांती जी के श्रद्धांजलि सभा का करे आयोजन
रामभक्ति से राष्ट्रनीति तक वेदांती महाराज की विरासत:महंत सुरेंद्र दास
रायपुर। सनातन चेतना को केवल धर्मस्थलों तक सीमित न रखकर उसे राष्ट्रनीति और जनजीवन की धुरी बनाने वाले परमपूज्य महान वैष्णव संत ब्रह्मर्षि रामविलास दास वेदांती महाराज के 15 दिसंबर को साकेतवास के बाद देशभर के संत समाज और राष्ट्रवादी विचारधारा में शून्यता महसूस की जा रही है। इसी कड़ी में धर्म स्तंभ काउंसिल ने प्रदेश के सभी मठों, मंदिरों और सनातन संगठनों से आह्वान किया है कि वे 28 दिसंबर को संगठित श्रद्धांजलि सभाओं एवं सुंदरकांड पाठ के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दें और उनके विचारों नई पीढ़ी से अवगत कराए.
धर्म स्तंभ काउंसिल का मत है कि वेदांती महाराज उन विरले संतों में थे जिन्होंने रामकथा को संसद से लेकर समाज तक मजबूती से स्थापित किया। संत परंपरा, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक स्वाभिमान को उन्होंने एक ही सूत्र में पिरोया। उनके विचार आज भी उन शक्तियों के लिए चुनौती हैं जो सनातन मूल्यों को हाशिये पर धकेलने का प्रयास करती रही हैं।
निर्वाणी अखाड़ा, नर्मदा कुंड के महंत श्री सुरेंद्र दास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वेदांती महाराज केवल संत नहीं थे, वे सनातन विचारधारा की मुखर राजनीतिक आवाज थे। जब-जब राष्ट्र और धर्म के प्रश्न खड़े हुए, उन्होंने निर्भीक होकर पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि हर मठ-मंदिर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि वैचारिक संकल्प है।
धर्म स्तंभ काउंसिल के सभापति डॉ. सौरव निर्वाणी ने कहा कि वेदांती महाराज का जीवन संदेश देता है कि संत समाज को केवल प्रवचन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राष्ट्र, संस्कृति और संविधानिक अधिकारों की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुंदरकांड पाठ और श्रद्धांजलि सभाएं आने वाले समय में सनातन समाज की संगठित शक्ति का सार्वजनिक प्रदर्शन बनेंगी।
डॉ. निर्वाणी ने यह भी कहा कि आज आवश्यकता है कि संत समाज वेदांती महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए धर्म, राजनीति और सामाजिक चेतना के बीच कृत्रिम दूरी को समाप्त करे। यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
धर्म स्तंभ काउंसिल ने सभी संत-महंतों, मंदिर ट्रस्टों, सामाजिक संगठनों और सनातन विचारधारा से जुड़े नागरिकों से अपील की है कि वे एकजुट होकर इस श्रद्धांजलि अभियान को व्यापक स्वरूप दें और सनातन चेतना को निर्णायक भूमिका में स्थापित करें।

