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डांस और नाटक के रंग में सजी दुनिया: ब्रह्मविद द ग्लोबल स्कूल में “अनेकता में एकता” की भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति….

Written by Kamlakar Yerpude

डांस और नाटक के रंग में सजी दुनिया: ब्रह्मविद द ग्लोबल स्कूल में “अनेकता में एकता” की भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति….

नृत्य-अभिनय के माध्यम से छात्रों ने विश्व की संस्कृतियों, परंपराओं और जीवन के चक्र को जीवंत किया, स्वरस्वती वंदना से हुई कार्यक्रम की भावपूर्ण शुरुआत…

रायपुर। ब्रह्मविद द ग्लोबल स्कूल में “अनेकता में एकता और जीवन का चक्र” विषय पर एक भव्य एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में विश्व संस्कृति, मानवीय मूल्यों एवं जीवन के वास्तविक अर्थ को रचनात्मक माध्यमों से प्रस्तुत करना था।

कार्यक्रम की शुभ शुरुआत छात्रों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक स्वरस्वती वंदना से की गई, जिसने सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिमय और प्रेरणादायी बना दिया।

इसके पश्चात छात्रों ने नृत्य और नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया कि नृत्य भावनाओं की वह भाषा है जिसमें शब्दों की आवश्यकता नहीं होती, वहीं नाटक केवल अभिनय नहीं बल्कि सोच, संवेदना और सीख का सशक्त माध्यम है।

छात्रों ने नृत्य-नाटिका के माध्यम से जापान की प्रसिद्ध चेरी ब्लॉसम संस्कृति और पारंपरिक पोशाक, साथ ही भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान के शहर काबुल की झलक प्रस्तुत की, जो अपनी मेहमाननवाज़ी, पिस्ता-बादाम की खेती के लिए प्रसिद्ध है। इस प्रस्तुति के माध्यम से मित्रता, दया और मानवता का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में श्रीलंका की सुंदर, शांत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध परंपराओं को भी दर्शाया गया। वहाँ की रंग-बिरंगी वेशभूषा और पारंपरिक नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसके अतिरिक्त छात्रों ने भारत की “एकता में विविधता” को अत्यंत अनोखे एवं रचनात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत किया। कश्मीर की वादियाँ, ताजमहल की अनुपम सुंदरता, राजस्थान की थिरकती रेत और दक्षिण भारत की समृद्ध विरासत जब संगीत और नृत्य में ढली, तो भारत की संस्कृति की वैश्विक पहचान जीवंत हो उठी।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत “जीवन का चक्र” पर आधारित प्रेरणादायी प्रस्तुति रही। बचपन में दाँत टूटने से लेकर युवावस्था और वृद्धावस्था तक के सफर को सरल एवं रोचक ढंग से दर्शाते हुए बच्चों ने यह संदेश दिया कि जीवन एक पूर्ण चक्र है, जिसे हर अवस्था में स्वीकार करना ही सच्ची समझदारी है।

इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने न केवल छात्रों की प्रतिभा को मंच प्रदान किया, बल्कि अभिभावकों एवं दर्शकों को भी संस्कृति, संवेदना और जीवन मूल्यों से जोड़ने का सफल प्रयास किया।

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