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महासमुंद में निकल-कॉपर प्रोजेक्ट में 40 लाख टन से अधिक खनिजीकरण की संभावना – कंपनी

रायपुर। डेक्कन गोल्ड माइन्स लिमिटेड (डीजीएमएल) ने सोमवार को कहा कि छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित भालुकोना निकल-कॉपर-प्लैटिनम ग्रुप एलिमेंट्स (पीजीई) परियोजना में शुरुआती खोज से 40 लाख टन से अधिक खनिजीकरण की संभावना का पता चला है।

सोना और महत्वपूर्ण खनिजों के कारोबार से जुड़ी कंपनी डीजीएमएल ने पिछले साल एक अप्रैल को महासमुंद जिले की बसना तहसील में भालुकोना-जामनिडीह ब्लॉक के लिए 30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का कंपोजिट लाइसेंस हासिल किया था। इस लाइसेंस के तहत कंपनी को पहले खनिजों की खोज करने और उसके बाद उनका खनन करने की अनुमति मिलती है। कंपनी ने सोमवार को बयान में कहा कि खोज के दौरान की गई ड्रिलिंग के आंकड़ों के शुरुआती भूवैज्ञानिक विश्लेषण से इस क्षेत्र में 40 लाख टन से अधिक खनिजीकरण की संभावना का अनुमान लगाया गया है।

कंपनी के अनुसार, यह शुरुआती अनुमान भालुकोना में पहचाने गए 1.3 किलोमीटर लंबे खनिजीकृत क्षेत्र के केवल 300 से 350 मीटर हिस्से में सतह के नजदीक मौजूद खनिजीकरण पर आधारित है।

डीजीएमएल ने बताया कि उसने मार्च 2026 में ‘डायमंड-कोर ड्रिलिंग’ के जरिये खनिजों की खोज शुरू की थी। इसके तहत अब तक 15 स्थानों पर ड्रिलिंग की गई है और इनकी कुल गहराई 2,773 मीटर रही है। कंपनी के अनुसार, इस खोज के दौरान परतदार ‘मैफिक-अल्ट्रामैफिक’ भूवैज्ञानिक संरचना की पहचान हुई है, जिसमें ‘निकल-कॉपर-पीजीई सल्फाइड’ खनिजीकरण मौजूद है। ड्रिलिंग से 100 मीटर से अधिक चौड़े खनिजीकृत क्षेत्र का पता चला है। यह क्षेत्र करीब 1.3 किलोमीटर लंबा है और 200 मीटर से अधिक गहराई तक फैला हुआ है।

इन नतीजों पर टिप्पणी करते हुए डेक्कन गोल्ड के प्रबंध निदेशक हनुमा प्रसाद मोडाली ने कहा कि ये शुरुआती अनुमान महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में भारत की घरेलू क्षमता का पता लगाने की दिशा में उत्साहजनक कदम हैं।

उन्होंने कहा, ”हमारा ध्यान वैज्ञानिक तरीके से खोज, तकनीकी सटीकता और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के जरिये भालुकोना परियोजना को आगे बढ़ाने पर है। इससे देश में खनन का मजबूत तंत्र विकसित करने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को अधिक लचीला और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलेगी।”

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मीडिया एमपीसीजी