राजधानी रायपुर की बहू के सिर सजा एशिया का ताज, उपलब्धि पर
गौरवान्वित जैन समाज ने अपने मंच पर बुलाकर किया सम्मानित
मुख्य अतिथि एवं निर्णायक मंडल बनाकर सौंपी नन्हीं प्रतिभाओं को परखने की जिम्मेदारी
दीपाक्षा जैन ने बच्चों की मेहनत और अभिभावकों के प्रयासों को सराहा
रायपुर। राजधानी रायपुर की बहू और दुर्ग की बेटी दीपाक्षा जैन के लिए यह गौरवपूर्ण अवसर रहा, जब मिसेज इंडिया यूनिवर्स एशिया 2026 – विजेता का प्रतिष्ठित ताज हासिल करने के बाद उन्हें अपने ही जैन समाज के एक भव्य आयोजन में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। अपनी इस उपलब्धि पर गौरवान्वित समाज ने उन्हें मुख्य अतिथि एवं निर्णायक मंडल के रूप में आमंत्रित कर सम्मानित किया और नन्हीं प्रतिभाओं की प्रतिभा को परखने का विशेष अवसर दिया।
दीपाक्षा ने निभाई निर्णायक की महती भूमिका
सृजन महिला मंडल द्वारा आयोजित भव्य वेशभूषा प्रतियोगिता में बच्चों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ हिस्सा लिया। अलग-अलग आकर्षक वेशभूषाओं, किरदारों और रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से नन्हें प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों की प्रस्तुतियों के पीछे उनके अभिभावकों की मेहनत और तैयारी भी दिखाई दी. कार्यक्रम के दौरान दीपाक्षा जैन ने निर्णायक मंडल के रूप में बच्चों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया और उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने बच्चों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता, प्रस्तुतिकरण और मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के मंच बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने और आगे बढ़ने का अवसर देते हैं।
बच्चों के शैक्षणिक विकास के लिए कार्य कर रही हैं दीपाक्षा
दीपाक्षा जैन की पहचान केवल सौंदर्य प्रतियोगिता विजेता के रूप में नहीं है। वे जैनम एकेडमी की संस्थापिका एवं शिक्षाविद्, अधिवक्ता, अभियंता एवं स्नातकोत्तर उपाधि धारक हैं। शिक्षा के क्षेत्र में वे बच्चों के शैक्षणिक विकास के साथ व्यक्तित्व विकास, रचनात्मक शिक्षा, खेल एवं कौशल आधारित गतिविधियों के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रही हैं। जैनम एकेडमी के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के साथ विभिन्न रचनात्मक और गतिविधि-आधारित शिक्षण अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उनका निरंतर प्रयास रहा है। यही कारण है कि शिक्षा और बच्चों से जुड़े इस आयोजन में उनकी निर्णायक मंडल के रूप में मौजूदगी को विशेष महत्व मिला। इस अवसर पर दीपाक्षा जैन ने कहा- “अपने ही जैन समाज द्वारा मेरी उपलब्धि पर गौरवान्वित होकर इतने सुंदर और बड़े आयोजन में मुझे मुख्य अतिथि एवं निर्णायक मंडल के रूप में आमंत्रित करना मेरे लिए बेहद खुशी और सम्मान की बात है। बच्चों के बीच रहकर उनकी प्रतिभा को परखना और उनका उत्साह बढ़ाना मेरे लिए बहुत विशेष अनुभव रहा। बच्चों ने जिस मेहनत और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुतियां दीं, वह वास्तव में सराहनीय है।”
कार्यक्रम को सफल बनाने में सृजन महिला मंडल की महिलाओं की सक्रिय भूमिका और प्रोत्साहन भी महत्वपूर्ण रहा। महिलाओं ने बच्चों और अभिभावकों का उत्साह बढ़ाया तथा पूरे आयोजन को व्यवस्थित एवं उत्साहपूर्ण बनाने में योगदान दिया। जैन समाज की ओर से अपनी बेटी की उपलब्धि को जिस तरह मंच देकर सम्मानित किया गया, वह इस बात को दर्शाता है कि समाज अपनी प्रतिभाओं को पहचानने, प्रोत्साहित करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए मंच देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




