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छत्तीसगढ़ में होगा जीवन विद्या का 28वां राष्ट्रीय सम्मेलन, पंजीयन शुरू

25 से 27 दिसंबर तक अभ्युदय संस्थान अछोटी में जुटेंगे देश-विदेश के प्रतिनिधि

राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए पंजीयन प्रारंभ, 1500 से 2000 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना

रायपुर। जीवन विद्या के 28वें राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन (पंजीयन) प्रारंभ हो गया है। यह सम्मेलन 25, 26 और 27 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के अभ्युदय संस्थान अछोटी में आयोजित होगा। जिसका केंद्रीय विषय ‘चेतना विकास मूल्य शिक्षा-संस्कार : परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था का आधार’ निर्धारित किया गया है। इस राष्ट्रीय आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेशों से भी लगभग 1500 से 2000 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

सम्मेलन में मध्यस्थ दर्शन सह-अस्तित्ववाद के प्रणेता ए. नागराज के विचारों के प्रकाश में चेतना विकास, मूल्य शिक्षा-संस्कार तथा परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था पर विचार-विमर्श होगा। सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से मानवीय मूल्यों पर आधारित सामाजिक व्यवस्था की स्थापना के लिए किए जा रहे प्रयासों, अनुभवों और प्रयोगों को साझा मंच प्रदान करना है। इसमें शिक्षा, मानवीय जीवन शैली और परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

सम्मेलन को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक और व्यावहारिक स्वरूप देने के लिए विभिन्न विषयों पर मंच चर्चा आयोजित की जाएगी। इसमें नए एवं युवा अध्येताओं के साथ वरिष्ठ विचारकों को भी अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। सम्मेलन में मानवीय जीवन शैली, ए. नागराज की जीवन यात्रा, मध्यस्थ दर्शन तथा व्यवस्था के पांच आयामों से संबंधित प्रयासों पर केंद्रित प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। इनके माध्यम से विभिन्न समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों, उत्पादन गतिविधियों और मानवीय जीवन शैली से जुड़े प्रयोगों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

पंजीयन प्रारंभ, आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन भी

जीवन विद्या के 28वें राष्ट्रीय सम्मेलन में सहभागिता के लिए पंजीयन प्रारंभ हो गया है। इच्छुक प्रतिनिधि सम्मेलन की वेबसाइट- ‘सम्मेलन डॉट मध्यस्थ डॉट ओआरजी/रजिस्ट्रेशन’ पर जाकर अपना पंजीयन करा सकते हैं। सम्मेलन से संबंधित सूचनाओं एवं जानकारियों के लिए निर्धारित व्हाट्सऐप समूह से भी जुड़ा जा सकता है।

सम्मेलन की थीम ‘चेतना विकास मूल्य शिक्षा-संस्कार: परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था का आधार’ के माध्यम से शिक्षा से व्यवस्था तक की अवधारणा को केंद्र में रखते हुए मानवीय मूल्यों पर आधारित जीवन और सामाजिक व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर राष्ट्रीय स्तर पर संवाद स्थापित किया जाएगा।

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