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सूर्य जगत की आत्मा है: डॉ.स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ

Written by Kamlakar Yerpude

रायपुर। पौष मास के अत्यंत पुनीत पावन पर्व पर शंकराचार्य आश्रम बोरिया कला रायपुर में चल रही सूर्य उपासना के प्रसंग पर बोलते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने बताया कि भुवन भास्कर सूर्य नारायण जगत की आत्मा है। संपूर्ण ग्रहों के राजा हैं तथा जगत को प्रकाशित करने वाले हैं। सूर्य की उपासना से प्राणियों के सभी प्रकार के रोग नष्ट हो जाते हैं, जिनको उत्तम स्वास्थ्य की कामना होती है और जो स्वस्थ प्रसन्न रहना चाहते हैं, उनको भगवान सूर्य की उपासना अवश्य करना चाहिए पौष के महीने में पूषा नामक सूर्य की उपासना की जाती है। पूषा नामक सूर्य की उपासना से व्यक्ति शरीर से पुष्ट और स्वस्थ हो जाता है इसलिए पौष मास सूर्य उपासना के लिए उत्तम माना जाता है यदि पौष मास में रविवार का दिन प्राप्त हो जाए तो अत्यंत विशिष्ट योग माना जाता है। रविवार को अवश्य ही भगवान सूर्य की प्रसन्नता के लिए व्रत और उपवास करना चाहिए। सूर्य उपासना की साधना करने वाले साधक को प्रतिदिन सूर्योदय के पूर्व शैया का परित्याग करना चाहिए सूर्य भगवान को अर्घ देकर के प्रणाम करना चाहिए। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए तथा रविवार को बिना नमक का भोजन कर एक समय व्रत करना चाहिए। सारे विश्व का पोषण करने वाले भगवान पूषा नामक इस मास की उपासना से प्रसन्न हो जाते हैं। अतः इस मास में अवश्य ही सूर्य पूजा करना चाहिए। भगवान श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब ने भी सूर्य की उपासना की और कुष्ठ रोग से मुक्ति प्राप्त की थी। आरोग्य की कामना के लिए सूर्य की उपासना अवश्य करना चाहिए। वेद के अनुसार परमात्मा की आंख से सूर्य की उत्पत्ति हुई अतः नेत्र विकार से मुक्ति के लिए सूर्य की उपासना अवश्य करना चाहिए। सूर्य महाप्राण है जीव अल्पप्राण है, सूर्य से मिलकर जीव भी प्राणवान होता है। भगवान सूर्यनारायण दिन-रात में समान प्रकाश करते हैं उनकी रश्मियां रात्रि में अंधकार तथा दिन में प्रकाश उत्पन्न करती हैं। सूर्य की रश्मियों से ही गर्मी, वर्षा, सर्दी का वातावरण उत्पन्न होता है और इसी से हमारा जीवन व्यवस्थित अपनी धरा पर चलता रहता है।

आज पौष रविवार के पुनीत पर्व पर समस्त गुरु भक्तों ने मिलकर सूर्य अर्घ्य, सूर्य अर्चन और सूर्य उपस्थान किया।

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Kamlakar Yerpude