रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण अंचलों तक संस्कार, संस्कृति और नैतिक शिक्षा को बच्चों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की दिशा में संस्कार शिक्षा फाउंडेशन ने पिछले छह माह में छत्तीसगढ़ में उल्लेखनीय कार्य किया। फाउंडेशन के लगभग 800 संस्कार शिक्षक प्रतिदिन प्राथमिक सरकारी एवं निजी विद्यालयों, स्वामी आत्मानंद विद्यालयों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में नि:शुल्क लगभग दो घंटे संस्कार शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
संस्कार शिक्षकों द्वारा बच्चों को संस्कार, संस्कृति, वेद मंत्र, गुरु मंत्र, भोजन मंत्र, शिष्टाचार, अनुशासन, नैतिक शिक्षा एवं जीवन-मूल्यों के माध्यम से शिक्षित एवं मार्गदर्शित किया जा रहा है। फाउंडेशन के अनुसार, यह पहल बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ समाज में संस्कारयुक्त एवं जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी क्रम में नशामुक्ति अभियान के अंतर्गत संस्कार शिक्षकों ने विभिन्न विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में लगभग 200 बच्चों को नशामुक्त जीवन जीने की शपथ दिलाई। बच्चों के माध्यम से परिवार और समाज तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने का प्रयास भी किया जा रहा है।
संस्कार शिक्षा फाउंडेशन के डायरेक्टर व फाउंडर धीरेंद्र कुमार शर्मा एवं अनिल सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि आज सरकार द्वारा बच्चों में संस्कार, नैतिक मूल्यों और समग्र व्यक्तित्व विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस दिशा में सरकार की नीतियों और सामाजिक उद्देश्य को आगे बढ़ाना समाज के प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति एवं संस्था का दायित्व है। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन द्वारा छत्तीसगढ़ के ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों में भी संस्कार शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ बच्चों के बीच कार्य कर रहे हैं।



