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ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय ने जारी की छत्तीसगढ़ के चूककर्ता संस्थानों की सूची

‘विश्वास 2026’ योजना का

लाभ उठाने की अपील

रायपुर। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के डिफ़ॉल्टर (चूककर्ता) संस्थानों के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई की जा रही है। इस वर्ष की शुरुआत में कुल बकाया राशि ₹2474.62 लाख दर्ज की गई थी, जिसमें से अगस्त 2026 तक ₹423.66 लाख (4 करोड़ 23 लाख 66 हजार रुपये) की सफल वसूली की जा चुकी है। शेष बची राशि को जल्द वसूलने के लिए संगठन द्वारा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020) के प्रावधानों के अनुसार कड़ी विधिक एवं वसूली कार्रवाई प्रस्तावित है।

इसी क्रम में, अंशदान विलंब से जमा करने वाले और प्रदेश के बड़े चूककर्ता संस्थानों के विरुद्ध गहन जांच व सख्त कार्रवाई हेतु क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री जयवदन इंगले के नेतृत्व में प्रवर्तन अधिकारियों (Enforcement Officers) की विशेष टीमों का गठन किया गया है।

वहीं, नियोक्ताओं को दंडात्मक मुकदमों से बचाने और पुराने विवादों के त्वरित निपटारे हेतु भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा COSS 2020 (सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020) के प्रावधानों के तहत ‘विश्वास 2026’ (VISHWAS) योजना शुरू की गई है. 

क्षेत्रीय भ.नि. क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर के आयुक्त-II गौरव डोगरा द्वारा मीडिया को दी गई जानकारी के अनुसार, विश्वास 2026 को अधिसूचना G.S.R. 525(E) दिनांक 29 जून 2026 के माध्यम से अधिसूचित किया गया है। यह योजना 29 जून 2026 से प्रभावी हुई है और अधिसूचना की तिथि से छह माह तक लागू रहेगी।

इस योजना का प्रमुख उद्देश्य— क्षतिपूर्ति एवं दंड से संबंधित पुराने विवादों का शीघ्र निपटारा करना, लंबित मुकदमेबाजी को कम करना, नियोक्ताओं को अनुपालन नियमित करने का अवसर प्रदान करना, कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा हितों की रक्षा करना; तथा EPFO और प्रतिष्ठानों के बीच विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान को प्रोत्साहित करना।
योजना के अंतर्गत व्यापक रूप से निम्नलिखित श्रेणियों के पात्र मामले शामिल हैं—
1. न्यायिक मंचों पर लंबित मामले – जहां क्षतिपूर्ति/दंड संबंधी आदेश को CGIT, उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय जैसे सक्षम न्यायिक मंचों के समक्ष चुनौती दी गई है।
2. अंतिम आदेश पारित हो चुके हैं, परंतु राशि लंबित है – ऐसे मामले जहां क्षतिपूर्ति या दंड का अंतिम आदेश पारित हो चुका है, किंतु उसकी राशि पूर्णतः या आंशिक
रूप से बकाया है, जिसमें Recovery Certificate (RRC) वाले मामले भी शामिल हो सकते हैं।
3. नोटिस जारी, लेकिन अंतिम आदेश लंबित – जहां क्षतिपूर्ति/दंड लगाने के लिए कार्यवाही प्रारंभ हो चुकी है और नोटिस जारी किया जा चुका है, किंतु अंतिम आदेश अभी पारित नहीं हुआ है।
4. चूक की पहचान हो चुकी है, लेकिन नोटिस जारी नहीं हुआ – ऐसे मामले भी योजना के दायरे में रखे गए हैं, जहां संबंधित चूक का पता लगाया जा सकता है, किंतु क्षतिपूर्ति/दंड की कार्यवाही हेतु अभी नोटिस जारी नहीं किया गया है। कम दरों पर क्षतिपूर्ति/दंड के निपटारे का अवसर.
योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पात्र प्रतिष्ठानों को सामान्य दरों की तुलना में कम दरों पर क्षतिपूर्ति/दंड के निपटारे का अवसर उपलब्ध कराया गया है। उपलब्ध सरकारी सूचना के अनुसार, निर्धारित परिस्थितियों और चूक की अवधि के आधार पर क्षतिपूर्ति की दरें 0.25% से 1.00% प्रति माह तक हो सकती हैं। इससे पुराने एवं लंबे समय से लंबित विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण राहत मिल सकती है।

क्षेत्रीय भ.नि. क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर के आयुक्त-II गौरव डोगरा द्वारा मीडिया को दी गई जानकारी के अनुसार, विश्वास 2026 के अंतर्गत पात्र मामलों के निपटारे के लिए पारदर्शी, पूर्णतः डिजिटल और समयबद्ध प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। EPFO के क्षेत्रीय कार्यालय में VISHWAS Cells स्थापित किया गया है , ताकि प्रतिष्ठानों को योजना की जानकारी, आवेदन प्रक्रिया तथा मामलों के शीघ्र निस्तारण में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। कार्यालय ने सभी चूककर्ता संस्थानों से अपील की है कि वे पूर्ण वैधानिक ब्याज (7Q) जमा कर ऑनलाइन माध्यम से विवादों के स्थायी समाधान हेतु ‘विश्वास 2026’ के इस अवसर का तुरंत लाभ उठाएं और किसी भी प्रकार की दंडात्मक या कुर्की की कानूनी कार्रवाई से बचें।
इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा कर्मचारी नामांकन अभियान (EEC), 2026 की शुरुआत की गई है, जो 1 जुलाई 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी है। यह योजना 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच छूटे हुए पात्र कर्मचारियों के स्वैच्छिक नामांकन का एक विशेष अवसर प्रदान करती है। इसके तहत यदि नियोक्ता द्वारा पूर्व में कर्मचारी अंशदान नहीं काटा गया था, तो कर्मचारी का अंशदान माफ कर दिया जाएगा; नियोक्ता को केवल अपना अंशदान, ब्याज और प्रशासनिक शुल्क जमा करना होगा, जबकि हर्जाना (Damages) मात्र ₹100/- तक सीमित रहेगा।
साथ ही, छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों (Exempted Establishments) के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिनांक 29.06.2026 की अधिसूचना संख्या G.S.R. 525(E) के माध्यम से ‘कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026’ अधिसूचित की गई है। उक्त योजना के भाग-सी (Part-C) के अंतर्गत ‘एम्नेस्टी-2026’ (Amnesty-2026) नामक एकमुश्त (One-time) राहत योजना का विशेष प्रावधान किया गया है जो अधिसूचना की तिथि से 6 माह तक लागू रहेगी। यह योजना ऐसे प्रोविडेंट फंड ट्रस्टों को अपने पिछले कार्यकाल का कार्योत्तर नियमितीकरण (Retrospective Regularisation) कराने का अवसर देती है, जो आयकर अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त थे लेकिन ईपीएफ अधिनियम के तहत औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं थे। इसके अंतर्गत पात्र संस्थानों को देय राशि, हर्जाने और ब्याज की कार्रवाई से राहत मिलेगी तथा न्यूनतम कर्मचारियों/कॉर्पस संबंधी शर्तों में छूट प्रदान की जाएगी।

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