- गांड़ा संस्कृति से जुड़े लोक पर्वों, लोक गीत, लोक वाद्य, सांस्कृतिक विरासत को आगामी वर्ष में स्थान दिलाने का राष्ट्रपति से आग्रह और अपेक्षा है।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज ने जताया आभार, राष्ट्रपति के नाम लिखा धन्यवाद पत्र।
नई दिली/ रायपुर, छत्तीसगढ़, दिनांक 18 सितंबर 2026। गोंड-गांड़ा, ओड़िया और जनजातीय की सांस्कृतिक परंपरा से गहराई से जुड़े प्रमुख लोकपर्व नुआखाई को राष्ट्रपति भवन में गरिमामय स्थान मिलने पर राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रति आभार व्यक्त किया है। राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज के संस्थापक अधिवक्ता भगवानू नायक ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान राष्ट्रपति भवन में नुआखाई जैसे लोकपर्व और लोक-संस्कृति को सम्मान मिलना उन करोड़ों लोगों के लिए गौरव का विषय है, जो पीढ़ियों से प्रकृति, कृषि, श्रम और सामुदायिक जीवन से जुड़ी इन परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति भवन केवल एक भव्य भवन नहीं, बल्कि भारत के संविधान, लोकतंत्र और हमारी विविधता में एकता का राष्ट्रीय प्रतीक है। इसलिए वहां देश के विभिन्न समुदायों की लोक-संस्कृति को स्थान मिलना सांस्कृतिक समावेश का सकारात्मक संदेश देता है।” भारत की वास्तविक सांस्कृतिक शक्ति केवल महानगरों में नहीं, बल्कि गांवों, खेतों, जंगलों और उन समुदायों के बीच भी मौजूद है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखा है। उन्होंने कहा राष्ट्रपति भवन द्वारा पिछले वर्षों में आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने और विशेषकर वंचित एवं पिछड़े वर्गों को विकास यात्रा से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है।
भगवानू नायक ने कहा राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज की अपेक्षा है कि भविष्य में राष्ट्रपति भवन में गांड़ा समाज के लोकपर्वों, लोककलाओं, लोकवाद्यों, सांस्कृतिक विरासत को भी इसी प्रकार राष्ट्रीय मंच एवं सम्मान प्राप्त होगा। इसी आशा और विश्वास के साथ नुआखाई लोक-संस्कृति को मिले सम्मान के लिए राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करता है।



