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कृष्ण की बाल लीला की कथा सुन भक्त हुए भाव विभोर..

Written by Kamlakar Yerpude

कृष्ण की बाल लीला की कथा सुन भक्त हुए भाव विभोर..

रायपुर। तेलीबांधा के चाणक्य स्कूल में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन भागवत भुषन ज्योतिषाचार्य पं मनोज शुक्ला ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने माखन चोरी की लीला और बालकृष्ण के नटखट स्वभाव को दर्शाते हुए बताया कि नन्हे कृष्ण ने गोकुलवासियों के दिलों में अपनी विशेष जगह बनाई। कथावाचक ने माखन चोरी की लीला का सुंदर चित्रण करते हुए कहा कि माखनचोरी केवल एक बाल लीला नहीं बल्कि इसके पीछे भगवान का गहरा प्रेम और स्नेह भाव छिपा हुआ है। कथा व्यास आचार्य श्री शुक्ला ने कहा कि श्रीकृष्ण का माखन चोरी करना इस बात का प्रतीक था कि वे अपने भक्तों का प्रेम पाना चाहते हैं। उन्होंने समझाया कि माखन, जो मेहनत और प्रेम का प्रतीक है भगवान को भोग के रूप में अत्यंत प्रिय था। बालकृष्ण अपने सखाओं के साथ गोपियों के घर में माखन चुराने जाते थे। जिससे गोपियों का उनके प्रति प्रेम और भी बढ़ जाता था। इसके बाद उन्होंने बालकृष्ण लीला पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृष्ण का बाल रूप प्रेम, आनंद और स्नेह का प्रतीक है। नन्हे कृष्ण की शरारतें गोकुलवासियों के दिलों में अमिट छाप छोड़ देती थी.. बालकृष्ण ने अपने बालसखाओं के साथ खेल-खेल में लीला करते हुए साधारण ग्वाल-बाल की तरह जीवन जीया। भक्तों को कथा में आगे बताया कि भगवान प्रेम और भक्ति से ही प्रसन्न होते हैं। कृष्ण की बाल लीलाएं यह बताती हैं कि ईश्वर अपने भक्तों के साथ सदा निकट रहते हैं और प्रेम से उनके जीवन में सम्मिलित रहते हैं। भगवान कृष्ण ने यमुना नदी में रहने वाले कालिया नाग को नाथ दिया। गोपियों के साथ भी लीला की। जब भगवान श्री कृष्ण बाल रूप में थे तभी मटकी से माखन चुरा लिया करते थे। और जब माता यशोदा कहती तब श्री कृष्ण भोलेपन से कहते मैया मै नहीं माखन खायो। जब ब्रज वासियों पर विपत्ती आई तो श्री कृष्ण ने एक ऊंगली से गोवर्धन पर्वत को उठाकर उनकी रक्षा की। कंस के दमनकारी आदेश के विरोध में भगवान ने गोकुलवासियों को जागृत कर उसका हक़ दिलाया। कृष्ण लीला के भावविभोर प्रस्तुति पर श्रद्धालु जमकर थिरके। कथा स्थल पर अविरल भक्ति रस की धारा बहने लगी।

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Kamlakar Yerpude