धर्म संस्कृति

बेटी पैदा होती है तो आज के समय में बड़े-धूमधाम से जन्मोत्सव मनाया जाता है, यह अच्छी बात है: संत शंभूशरण लाटा महाराज

 

  •  महादेव को पूजने के लिए राम नाम का महामंत्र रोज बोलना पड़ेगा

  • आज लोग धर्म को समझना भूल गए हंै और शरीर पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं

 

रायपुर। मैक कॉलेज आॅडिटोरियम समता कॉलोनी में श्रीराम कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए दूसरे दिन संत शंभूशरण लाटा महाराज ने बताया कि रामकथा सुनने से जन्म-जनमांतर की व्यथा दूर हो जाती है। संसार में ऐसा कोई व्यक्ति जन्म नहीं लिया है जिसे यह संसार छोड़कर ना जाना पड़े। लेकिन अगर उस व्यक्ति को थोड़ा सा पॉवर मिल जाए और उसे मद (अहंकार) ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता। ऐसा ही सतीजी  के पिता महाराज दक्ष को हुआ था। आज आधा संसार इसी में दु:खी है कि उसने ऐसा कर दिया और वैसा कर दिया, अगर हम मान लेते तो संसार दु:खी नहीं होता। गोस्वामीजी कहते हैं कि मांगा हुआ दु:ख आपको छोड़ना पड़ेगा, अगर आपकी मान्यता में दु:ख बैठा हुआ है तो उसको अभी छोड़ना पड़ेगा, अगर उसे छोड़ दोगे तो फिर से तुम सुखी हो जाओगे।

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कथा के दौरान लाटा महाराज ने श्रद्धालुओं से बुरा ना मानने की बात कहते हुए कहा कि माता सती संशय और माता पार्वती श्रद्धा के रूप में पूजी जाती हैं। संशय को जलना पड़ता है, लेकिन श्रद्धा बनने के लिए हमारे अंदर श्रद्धा, शीतलता होना जरूरी है। जिसका हृदय शीतल होगा वहां श्रद्धा का होना स्वाभाविक है। पुराने जमाने में बेटी के जन्म होने पर उत्सव नहीं मनाया जाता था लेकिन आज के समय में अगर घर में बेटी पैदा होती है तो बड़े-धूमधाम के साथ उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है, यह अच्छी बात है।

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महाराजश्री ने आगे कहा कि पिता, गुरु, स्वामी और मित्र के घर में अगर कोई मंगल काम हो तो बिना पूछे या आमंत्रण के नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इससे विरोध पैदा होना स्वाभाविक है। अभिमान ऐसी चीज है जो कोई रिश्ता नहीं मानता है। अभिमान अगर हो जाए तब बेटी भी सुख के काम में बिना बुलाए पहुंचती है तो गुस्सा होना स्वाभाविक है, ऐसा ही माता सती के साथ हुआ था जब वे पिता दक्ष के ना दिए निमंत्रण पर उनके यहां चले गर्इं थीं। शिव का अर्थ कल्याण है और जिस यज्ञ में कल्याण नहीं वह यज्ञ कभी पूर्ण नहीं हो सकता है। यज्ञ होता है स्वाहा: के लिए लेकिन दक्ष ने यज्ञ किया वाह-वाह के लिए।

देवताओं को पूजने में बहुत खर्च होता है लेकिन महादेव को पूजने के लिए राम नाम का महामंत्र रोज बोलना पड़ता है। आप मंदिर जाओ, जल चढ़ाओं और ऊँ नम: शिवाय बोलो लेकिन एक बार बाबा राम-राम बोलकर देखो तुम्हारे सारे दुख छूमंतर हो जाएंगे। हम भी मंत्र बहुत जानते है लेकिन पूजा करते समय एक बार जरुर बाबा राम-राम बोलते है।

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मीडिया एमपीसीजी