रायपुर। एमए छत्तीसगढ़ी भाषा डिग्रीधारी छात्र छात्राओं के एक प्रतिनिधि मंडल ने तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब से उनके नवा रायपुर स्थित निवास मुलाकात कर अपनी बात रखी। जिसमें छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षा और रोजगार को लेकर चर्चा हुई और मांग की गई कि राज्य के सभी स्कूलों में पहली से 12वीं कक्षा तक छत्तीसगढ़ी भाषा पढ़ाई जाए। इस पर मंत्री खुशवंत साहेब ने आश्वस्त किया कि जल्द ही प्रतिनिधि मंडल की मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से समय लेकर मुलाकात कराई जाएगी। साथ ही नई शिक्षा नीति 2020 को पूर्ण रूप से लागू करवाने की मांग पर भी मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत चर्चा की जाएगी।
छात्र संगठन के प्रमुख जीतेंद्र कुमार साहू ने बताया कि 8वीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से 8 भाषाओं की लिपि देवनागरी है। छत्तीसगढ़ी भाषा की लिपि भी देवनागरी है, तो इसमें लिपि की कहीं कोई दिक्कत नहीं है, रही बात व्याकरण की तो वर्ष 1885 में हीरालाल काव्योपाध्याय द्वारा व्याकरण लिखा गया है जिसे जार्ज ग्रियर्सन द्वारा स्वीकार किया गया है। साथ ही नई शिक्षा नीति में अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करना अनिवार्य किया गया है, फिर भी छत्तीसगढ़ी भाषा को नजर अंदाज किया जा रहा है। इस पर मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति में यह स्पष्ट प्रावधान है कि राज्य की राजभाषा, स्थानीय भाषा में शिक्षा प्रदान करना है, जिसके लिए 8वीं अनुसूची कोई बाधा उत्पन्न नहीं करता है। साथ ही कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा हमारी पहचान है, बाबा गुरु घासीदास ने छत्तीसगढ़ी में कहा है ‘मनखे मनखे एक समान’ छत्तीसगढ़ी भाषा 2008 से राजभाषा बन चुकी है और नई शिक्षा नीति भी स्थानीय भाषा में शिक्षा का समर्थन करता है। इन सभी बातों को मुख्यमंत्री के साथ प्रतिनिधि मंडल की मुलाकात में रखी जाएगी और छत्तीसगढ़ी भाषा को पढ़ाई-लिखाई के साथ रोजगार से भी जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा करने का आश्वासन दिया गया। इस प्रतिनिधि मंडल में छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष रमेंद्रनाथ मिश्रा, राज आंदोलन से जुड़े उदयभान सिंह चौहान, रमा जोशी, प्रभा जोशी, रेखा जोशी, रामेश्वर शर्मा, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी मुरली मनोहर खंडेलवाल, छत्तीसगढ़ी भाषा छात्र संगठन के प्रमुख जीतेंद्र कुमार साहू, खिलेश्वर चंद्रवंशी, प्रवीण, राजेंद्र आदित्य, देवेंद्र, उद्योरम साहू सहित बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ी प्रेमी उपस्थित रहे।