छत्तीसगढ़ धर्म संस्कृति

इस वर्ष भी तीजा में अयोध्या से आएंगी माता कौशल्या

विधि विधान की तिथियां जारी की गईं

अयोध्या से लाई पवित्र मिट्टी से बनाई जाएगी माता कौशल्या की भव्य मूर्ति 

रायपुर। चित्रोत्पला लोक कला परिषद द्वारा 2023 से लगातार, ‘माता कौशल्या संग तीजा तिहार’ का आयोजन ग्राम चंदखुरी में किया जा रहा है। इस साल चौथा वर्ष है। इस कार्यक्रम की परिकल्पना तथा इसे आरंभ करने में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक कलाकार संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित राकेश तिवारी का प्रमुख योगदान है। कार्यक्रम के संबंध में राकेश तिवारी का कहना है, कलाकार साहित्यकार का दिमाग क्रियाशील रहता है। ऐसे ही एक दिन 2023 में मैंने कल्पना की कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं का प्रमुख त्योहार तीजा है। उस दिन समस्त छत्तीसगढ़ की महिलाएं अपने मायके आती हैं। हमने भी पुरखों से यही सुना है कि राजा भानुवंत कौशल प्रदेश के राजा थे एवं उनकी बेटी कौशल्या का विवाह अयोध्या नरेश चक्रवर्ती राजा दशरथ से हुआ था। इस तरह कौशल्या हमारी बहन, बुवा, माता हुई। तो क्यों ना सब लोगों की तरह माता कौशल्या को तीजा में लेवा कर लाया जाय और यहीं से इस परंपरा की शुरुआत हुई।

इस कार्यक्रम के लिए अयोध्या जाकर वहां की मिट्टी लाई जाती है, उसी मिट्टी से मूर्ति बनाकर उस मूर्ति को पंडवानी गायिका प्रभा यादव के घर स्थापित किया जाता है। और पांच दिन तक विधि विधान के साथ, जैसे एक बहन के साथ तीजा मनाते हैं उसी तरह तीजा तिहार मनाया जाता है।

इसी श्रृंखला में 23 अगस्त 2026, सोमवार को श्रीमती प्रभा यादव, पंडवानी गायिका द्वारा अंगाकर रोटी, गुड़ और आचार देकर लेवालों को अयोध्या रवाना किया गया।

लेवालों ने ग्रहण की अयोध्या की पवित्र मिट्टी

आज मंगलवार, 25 अगस्त को लेवाल डॉक्टर पुरुषोत्तम चंद्राकर एवं पंडित राजेश शर्मा द्वारा अयोध्या से राजा दशरथ की अनुमति लेकर अयोध्या की पवित्र मिट्टी ग्रहण की गई।

  • बुधवार, 26 अगस्त को रायपुर रेलवे स्टेशन में लेवालों का स्वागत किया जाएगा।
  • गुरुवार, 27 अगस्त को अयोध्या से लाई गई मिट्टी को निमोरा स्थित प्रसिद्ध मूर्तिकार पीलू साहू को सौंपी जाएगी।
  • 10 सितंबर 2026 को माता कौशल्या की भव्य मूर्ति (गोदी में बाल रामलला बैठे हुए ) को बाजे गाजे के साथ चंदखुरी ले जाया जाएगा।
  • 11 सितंबर 2026 को माता कौशल्या की मूर्ति की स्थापना एवं पूजा पाठ सुबह और शाम छत्तीसगढ़ी भाषा में आरती एवं ठेठरी खुरमी के विशेष भोग लगाना।
  • 12 सितंबर 2026 को बच्चों द्वारा भांचा राम के समक्ष नांदिया बैला दौड़ तथा जांता पीसने का प्रदर्शन।
  • 13 सितंबर 2026 को माता कौशल्या को करू भात खिलाकर उपवास रखना।
  • 14 सितंबर 2026 को माता कौशल्या के सामने भजन, कीर्तन, पंडवानी, भरथरी का आयोजन रात्रि जागरण का कार्यक्रम।
  • 15 सितंबर 2026 को माता कौशल्या को बासी खिलाना तथा साड़ी भेंट कर विदाई का भावपूर्ण कार्यक्रम होगा।

आयोजन में इन संस्कृति धर्मियों का साथ

यह अपने तरीके का एक अनूठा कार्यक्रम है। जिसका उद्देश्य हमारी संस्कृति को धर्म से जोड़कर सहेजने का एक प्रयास है। कार्यक्रम के संरक्षक राजेश्री महंत रामसुंदर दास महाराज दूधाधारी मठ रायपुर एवं प्रतीक बैस अध्यक्ष नगर पंचायत चंदखुरी, कार्यक्रम संयोजक राकेश तिवारी, मार्गदर्शक अशोक तिवारी, सह संयोजक शोभा यादव, हेमलाल पटेल, नरेंद्र यादव, डॉक्टर पुरुषोत्तम चंद्राकर, राजेश शर्मा, ननकी ठाकुर, घंसिया राम वर्मा, सुरेश ठाकुर, तेजराम साहू सहित चंदखुरी तथा रायपुर के गणमान्य नागरिक तथा कलाकार हैं।

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