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आज ‘रमा एकादशी’ के पूजन से मिलेगा लक्ष्मी पूजा के बराबर का फल

आज ‘रमा एकादशी’ के पूजन से मिलेगा लक्ष्मी पूजा के बराबर का फल


  • रायपुर। सनातन धर्म के सबसे बड़े 5 दिवसीय महापर्व दीपावली की श्रृंखला में गुरुवार, 5 नवंबर को ‘रमा एकादशी’ का पर्व मनाया जाएगा और दूसरे दिन शुक्रवार को धनतेरस पूजन पर्व है। धर्मशास्त्रियों के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘रमा एकादशी’ कहते हैं। रमा अर्थात् मां लक्ष्मी। रमा एकादशी दीपावली से 3 दिन पहले आती है, इसलिए इसे सबसे बड़ी एकादशी में गिना जाता है।

क्यों खास है रमा एकादशी?

मां महामाया मंदिर रायपुर के ज्योतिषी एवं भागवताचार्य पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि इस एक दिन के व्रत से ब्रह्महत्या जैसे पाप भी मिटते हैं और घर में लक्ष्मी टिकती है। जो दिवाली की पूजा में शामिल नहीं हो पाते, उनके लिए रमा एकादशी की पूजा, लक्ष्मी पूजन के बराबर फल देती है।

व्रत कथा –

रमा एकादशी में मुचुकुंद राजा की बेटी चंद्रभागा और राजा चंद्रसेन के बेटे शोभन की कथा है। शोभन बहुत कमजोर था, भूख बर्दाश्त नहीं कर पाता था, फिर भी पत्नी के कहने पर उसने रमा एकादशी का व्रत रखा। भूख से उसकी मृत्यु हो गई, लेकिन व्रत के प्रभाव से उसे मंदराचल पर्वत पर सोने-हीरे का राज्य मिला। चंद्रभागा को जब पता चला तो वह भी व्रत के पुण्य से उसी दिव्य लोक में पति के पास चली गई। तभी से ये व्रत पति-पत्नी के साथ के लिए किया जाता है।

पूजा विधि

धर्मशास्त्री पंडित चन्द्रभूषण शुक्ला ने बताया कि इसकी पूजा विधि एकदम सरल है।

1. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप।

2. विष्णुजी को तुलसी, पीले फूल, तुलसी दल का अर्पण।

3. शाम को विष्णु सहस्रनाम, गीता का 11वां अध्याय पढ़ना चाहिए।

4. रात में दीया जलाकर भजन किया जाता है, इस रात जागरण का बहुत पुण्य है।

5. इस दिन अन्न, चावल, दाल, प्याज-लहसुन नहीं खाया जाता है। सिंघाड़ा, फल, दूध, पानी ले सकते हैं।

इस दिन क्या करें?

  • लक्ष्मी-विष्णु की साथ पूजा- दिवाली से पहले घर की सफाई करके लक्ष्मी को निमंत्रण दें।

  • 11 तुलसी के पत्ते भगवान विष्णु को चढ़ाएं।

  • दूसरे दिन गरीब-असहायों को चावल दाल और घी का दान करें।

किसे लाभ?

जिनके घर में पैसे टिकते नहीं, कर्ज है, या पति-पत्नी में क्लेश है, उन्हें यह ‘रमा एकादशी’ व्रत जरूर करना चाहिए।

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मीडिया एमपीसीजी