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बंधन से शिखर तक पहुंचने का मार्ग है मनन, चिंतन, मंथन : साध्वी मंजुलाश्री

रायपुर। आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्रीजिनकुशल जैन दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए साध्वी मंजुलाश्री ने बुधवार को जीवन में बनने वाले संबंधों और कर्मबंधनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में मनन, चिंतन और मंथन करते रहना चाहिए। यही प्रक्रिया उसे बंधनों से ऊपर उठाकर आत्मकल्याण के शिखर की ओर ले जाती है। साध्वीश्री ने कहा कि व्यक्ति जीवनभर बहुत संघर्ष करता है, लेकिन हर संघर्ष के बदले उसे सम्मान या अपेक्षित परिणाम मिले, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में ‘ऋणानुबंध’ को समझना जरूरी है। जीवन में मिलने वाले कई संबंध और परिस्थितियां हमारे पूर्व कर्मों से जुड़े होते हैं। इस भाव को समझ लेने से व्यक्ति की शिकायत, क्रोध और कषाय धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।संसार के सभी रिश्ते किसी न किसी ऋणानुबंध से जुड़े हैं। लेकिन जब इन रिश्तों में अपेक्षा और अधिकार के स्थान पर मैत्री भाव आ जाता है, तो संबंधों में सहजता आती है और आत्मकल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

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