रायपुर। श्रीदिगंबर जैन आदिश्वरधाम नवोदय तीर्थ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में समयोपदेश वर्षायोग 2026 समिति के तत्वावधान में विविध धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी है। बुधवार को हुई धर्मसभा में मुनिश्री आगम सागर महाराज ने कहा, केवल तन तपाने से नहीं, भेद-विज्ञान और सम्यक श्रद्धा से ही आत्म-कल्याण की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा, जिस जीव का यह विवेक जागृत हो जाता है कि आत्म-कल्याण के लिए किस मार्ग पर चलना है और जिसे आत्मा व अनात्मा का भेद समझ आ जाता है, उसे ही विशुद्ध पुण्य और सम्यक ज्ञान की प्राप्ति होती है। मुनि भगवंत ने आगे कहा, जैन धर्म की नींव सत्य, विश्वास और सम्यक दर्शन पर टिकी है। संसारी अवस्था में आत्मा अकेली नहीं रहती, बल्कि पूर्वकृत कर्मों के कारण कर्म-बंध से जुड़ी रहती है। जीव को प्राप्त होने वाला शरीर, जीवन और भौतिक सुविधाएं उसके कर्मों का ही फल है। बुधवार को अपार भक्ति, ध्यान और स्वाध्याय के वातावरण में मूलनायक भगवान के अभिषेक व शांतिधारा सहित विविध धार्मिक अनुष्ठान हुए।



