माता हासी देवी की 200वीं जयंती पर आज जारी होगा 200 का सिक्का और विशेष डाक टिकट
रायपुर के लोकभवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज को करेंगी विमोचन
माता की आध्यात्मिक विरासत और कल्याणकारी कृतित्व को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान
रायपुर। शदाणी दरबार तीर्थ की पंचम पीठाधीश्वर माता हासी देवी की 200वीं जन्म जयंती का अवसर ऐतिहासिक गौरव का साक्षी बनने जा रहा है। इस अवसर पर भारत सरकार की ओर से उनके सम्मान में 200 रुपए का स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी किया जाएगा। इनका विमोचन 22 अक्टूबर को रायपुर के लोक भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी। समारोह में शदाणी दरबार तीर्थ के नवम पीठाधीश्वर संत डॉ. युधिष्ठिर लाल महाराज विशेष रूप से सम्मिलित रहेंगे।
माता साहिब हासी देवी का अवतरण वर्ष-1826 में सिंध की धरा पर हुआ था। वर्ष 1852 में उन्होंने शदाणी दरबार की पंचम गद्दी का दायित्व संभाला और भक्ति, सेवा, त्याग एवं परोपकार की परंपरा को आगे बढ़ाया। उनका संपूर्ण जीवन आध्यात्मिक साधना और मानवता के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण रहा। उन्होंने भजन-कीर्तन, धार्मिक उपासना और आध्यात्मिक शिक्षाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, सदाचार और सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
शदाणी दरबार तीर्थ के आधिकारिक इतिहास में माता साहिब की अन्न सेवा से जुड़ा एक अत्यंत प्रेरणादायी प्रसंग वर्णित है। सिंध में अकाल पड़ने के दौरान माता साहिब ने ईश्वर से कृपा की प्रार्थना की और गेहूं से भरे लोहे के एक पात्र से अन्न सेवा आरंभ करवाई। यह सेवा लगातार छह माह तक चलती रही। इस अवधि में प्रतिदिन हजारों की संख्या में दरबार आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराया जाता रहा। पात्र से निरंतर गेहूं निकलने और अन्न सेवा अनवरत जारी रहने का यह प्रसंग माता साहिब की अटूट श्रद्धा, करुणा और सेवाभाव का प्रतीक माना जाता है।
माता साहिब के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था में स्वास्थ्य लाभ और संतान-सुख से जुड़े अनेक श्रद्धापूर्ण प्रसंग भी सुनाए जाते हैं। श्रद्धालुजन रोगों से उबरने, कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से स्वास्थ्य लाभ मिलने तथा संतान-सुख प्राप्त होने के अपने अनुभवों को माता साहिब की कृपा और आशीर्वाद से जोड़कर स्मरण करते हैं। ये प्रसंग श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और माता साहिब के प्रति उनके आध्यात्मिक जुड़ाव को दर्शाते हैं।
माता साहिब ने धार्मिक ज्ञान एवं आध्यात्मिक संस्कारों के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शदाणी दरबार के सप्तम पीठाधीश संत राजाराम साहिब को धार्मिक शिक्षा एवं शास्त्रों का ज्ञान देने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनका जीवन इस संदेश को प्रतिष्ठित करता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और लोककल्याण के माध्यम से भी अभिव्यक्त होती है।
शदाणी दरबार तीर्थ की पहचान ऐसी आध्यात्मिक परंपरा से है, जिसमें मानव सेवा को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। जाति-पाति, धर्म, वेशभूषा और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर प्रत्येक व्यक्ति के प्रति प्रेम, सम्मान और सेवाभाव रखना दरबार की मूल भावना है। संतों की शिक्षाओं से प्रेरित यह परंपरा समाज में सद्भाव, एकता और परोपकार का संदेश देती है।
इसी लोककल्याणकारी भावना के अंतर्गत सामूहिक जनेऊ संस्कार, सामूहिक विवाह समारोह, नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, ज्ञानवर्धक शिविर तथा विभिन्न धार्मिक-सामाजिक सेवा गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इन प्रयासों का उद्देश्य जरूरतमंदों को सहायता प्रदान करना, सामाजिक संस्कारों को प्रोत्साहित करना और समाज के प्रत्येक वर्ग तक सेवा पहुंचाना है। माता साहिब हासी देवी की सेवा-साधना और शदाणी संतों की आध्यात्मिक विरासत इसी मानवीय दृष्टिकोण को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाती रही है।
माता साहिब की भक्ति, सेवा-साधना और लोककल्याण के आदर्शों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने वाला ऐतिहासिक कदम : संतश्री डॉ. युधिष्ठिर लाल महाराज
माता साहिब हासी देवी की 200वीं जन्म जयंती पर स्मारक सिक्का एवं विशेष डाक टिकट जारी किए जाने पर शदाणी दरबार तीर्थ के नवम पीठाधीश संतश्री डॉ. युधिष्ठिर लाल महाराज ने भारत सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान माता साहिब की भक्ति, सेवा-साधना और लोककल्याण के आदर्शों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने वाला ऐतिहासिक कदम है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को उनकी पावन शिक्षाओं और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सिंधी समाज, शदाणी दरबार के अनुयायियों तथा देश-विदेश में बसे श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत गौरव और श्रद्धा का अवसर : उदय शदाणी
शदाणी दरबार तीर्थ के सचिव उदय शदाणी ने कहा कि माता साहिब हासी देवी के सम्मान में 200 रुपए का स्मारक सिक्का एवं विशेष डाक टिकट जारी होना समस्त सिंधी समाज, शदाणी दरबार के अनुयायियों तथा देश-विदेश में बसे श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत गौरव और श्रद्धा का अवसर है। यह सम्मान माता साहिब के आध्यात्मिक योगदान, सेवाभाव और मानव कल्याण की शिक्षाओं को व्यापक पहचान प्रदान करेगा तथा भावी पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक-आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जन्म जयंती महोत्सव पर हुआ श्रीमद् देवी भागवत का आयोजन
उल्लेखनीय है कि माता साहिब हासी देवी की 200वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में इस वर्ष भव्य जन्म जयंती महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसके अंतर्गत श्रीमद् देवी भागवत का भी आयोजन हुआ। अब 22 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा स्मारक सिक्के एवं विशेष डाक टिकट का विमोचन माता साहिब की पावन स्मृति, शदाणी दरबार तीर्थ की गौरवशाली संत परंपरा और मानव सेवा के आदर्शों को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने वाला ऐतिहासिक अवसर बनेगा।