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पति की लंबी उम्र की कामना से करवा चौथ व्रत आज गुरुवार को

यदि चंद्रमा आसमान पर न दिखा तो…, ज्योतिषियों-धर्माचार्यों ने बताए वैकल्पिक उपाय

रायपुर। पति-पत्नी के प्रेम को दर्शाने वाला तथा पति की लंबी आयु की कामना से किया जाने वाला करवा चौथ व्रत पर्व कार्तिक कृष्ण चतुर्थी व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं पूरे वर्षभर करवा चौथ के त्यौहार की प्रतीक्षा करती हैं और जब करवा चौथ का दिन आता है, तो वे अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। वैदिक पंचाग व हिंदू कैलेंडर के अनुसार करवा चौथ का त्यौहार इस साल गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस त्यौहार में करवे का बहुत महत्व है। राजधानी रायपुर के पूजन सामग्री के बाजार में इन दिनों मिट्टी के करवे के साथ दीये आदि की मांग बढ़ गयी है। करवा चौथ के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए प्राय: मिट्टी के बर्तनों के उपयोग का विधान है।

पूजन मुहूर्त शाम 5:45 बजे से, चंद्रोदय

रात्रि 8.13 बजे: पं. मनोज शुक्ला

मां महामाया मंदिर रायपुर के ज्योतिषी एवं पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि यह व्रत हरतालिका तीज के समान ही सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा निर्जला व्रत है। यह पति की लंबी उम्र, स्वस्थ जीवन और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है। इस दिन कुंवारी युवतियां भी अच्छे वर प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत की पूजा का मुहूर्त शाम 05:45 से 07:05 तक शुभ है तथा चंद्रोदय रात 08:13 बजे है, इसलिए रात्रि 8.13 के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर चांद देखकर ही व्रत खोला जाएगा।

करवा माता को सुहाग की रक्षक माना जाता है: पं. चंद्रभूषण

धर्मशास्त्री पंडित चन्द्रभूषण शुक्ला ने बताया कि देवी करवा अपने पति के प्राण यमराज से लड़कर वापस ले आई थीं, तभी से करवा माता को सुहाग की रक्षक माना जाता है। दूसरी कथा- महाभारत में द्रौपदी ने अर्जुन के लिए ये व्रत किया था, जिससे पांडवों की रक्षा हुई। इसलिए प्रत्येक विवाहित महिलाओं को अपने पति की लंबी आयु व सुरक्षित जीवन की कामना हेतु तथा विवाह योग्य युवतियों को मनपसंद अच्छे वर की प्राप्ति हेतु यह व्रत करना चाहिए।

पूजा विधि-

0 सुबह सरगी- सास अपनी बहू को सूर्योदय से पहले भोजन व श्रृंगार का सामान देती है।

0 कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर रखा जाने वाला करवा चौथ का व्रत दिनभर निर्जला अर्थात् बिना जल ग्रहण किए किया जाता है।

0 शाम को स्वच्छ वस्त्र धारण कर मेंहदी आलता लगाकर चौकी में कलश, करवा माता, शिव-पार्वती, गणेश और चंद्रमा की पूजा कर कथा सुनी जाती है।

0 चंद्रदेव के निकलने पर छलनी से पहले चंद्र को, फिर पति को देखकर चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। कथा सुने बिना व्रत अधूरा माना गया है। काले-सफेद कपड़े इस दिन नहीं पहनने चाहिए। कैंची-सुई जैसी नुकीली सामग्री का उपयोग इस नहीं करना चाहिए। चंद्रदेव के दर्शन से पहले व्रत नहीं खोलना चाहिए।

यदि चंद्रमा आसमान पर न दिखा तो, यह

है विकल्प: ज्योतिषाचार्य पं. सत्यम मिश्रा

हाथों में मेहंदी, सजी पूजा की थाली और आंखों में चांद का इंतजार करवा चौथ की शाम कुछ ऐसी ही होती है। लेकिन इस बार आसमान में चांद के साथ बादलों की लुका-छिपी भी देखने को मिल सकती है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान अर्नब के असर से 29 अक्टूबर को मौसम बदलने और दोपहर बाद बादल छाने के साथ बूंदाबांदी होने की संभावना है। मौसम की भविष्यवाणी ने इस बार खास पल को लेकर उत्सुकता के साथ थोड़ी चिंता भी बढ़ा दी है। यदि चंद्रदेव निकलने के समय आसमान साफ नहीं हुआ, तो चांद के दीदार के लिए इंतजार लंबा हो सकता है। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं के सामने प्रश्न है कि यदि चंद्रमा बादलों में छिपा रहा तो व्रत कैसे खोलेंगी? श्रीनर्मदेश्वर महादेव मंदिर, यदुवंशी चौक हीरापुर के ज्योतिषाचार्य पं. सत्यम मिश्रा ने बताया कि यदि परिस्थिति अनुसार चंद्रदेव के दर्शन नहीं हो पाते हैं, आकाश पर बादल छाए हुए हों तो भी पहले चंद्रोदय की प्रतिक्षा अवश्य कर लें। तो भी यदि चंद्रोदय न हो रहा हो तो उनका स्मरण करते जिस दिशा में चंद्रदेव दर्शन देते हैं, उसी दिशा में मुख करके चंद्रदेव के मंत्र का जाप करते हुए जल चढ़ाएं। इसके बाद पतिदेव का दर्शन करें तदनन्तर जल ग्रहण कर सकते हैं।

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मीडिया एमपीसीजी