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सावन के रंगों में रंगा सुरमयी उत्सव

कमला देवी संगीत महाविद्यालय में विद्यार्थियों-कलाकारों ने गायन-वादन कर मनाया सावन

रायपुर। सावन का महीना केवल प्रकृति में हरियाली और वर्षा का संदेश लेकर नहीं आता, बल्कि भारतीय संगीत परंपरा में भी इसका अपना विशेष स्थान है। जब सामान्य जन भजन-कीर्तन और भगवान के स्मरण के माध्यम से सावन का आनंद लेते हैं, तो संगीत से जुड़े विद्यार्थी और कलाकार सुर, ताल और भावों के माध्यम से इस ऋतु का स्वागत क्यों न करें। इसी भावना के साथ कमला देवी संगीत महाविद्यालय में सावन के अवसर पर एक विशेष सांगीतिक आयोजन किया गया।कार्यक्रम दो भागों में आयोजित हुआ। प्रथम भाग में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी क्षमता, प्रतिभा और सांगीतिक अभिव्यक्ति के अनुरूप विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। वंदना साहू ने “सावन का महीना पवन करे शोर” तथा “रिमझिम गिरे सावन” जैसे लोकप्रिय गीतों से वातावरण को सावनमय कर दिया। राधिका यादव ने सावन पर आधारित गीत प्रस्तुत किया, वहीं छाया मौसमी ने दादरा की प्रस्तुति दी। नितिन लुनिया ने निर्गुण भजन के माध्यम से कार्यक्रम में आध्यात्मिक रंग भरा। इसके साथ ही डॉ. विनीत कुमार वर्मा, खुशी श्रीवास्तव एवं जितेंद्री निषाद सहित विद्यार्थियों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं की सराहना प्राप्त की।

कार्यक्रम के दूसरे भाग में विद्यार्थियों के विशेष अनुरोध पर श्रीमती मंजूषा बेडेकर ने विदुषी डॉ. अनीता सेन की रचना “झमक झुकी आई बदरिया कारी, झूला झूले नंदकिशोर” प्रस्तुत की। उपशास्त्रीय संगीत की यह झूला रचना सावन की पारंपरिक सांगीतिक अनुभूति को अत्यंत सुंदर ढंग से सामने लाती है। तबले पर वेद प्रकाश आदित्य ने प्रभावी संगति की।इसी क्रम में डॉ. दीपक बेडेकर ने राग देश एवं मियां मल्हार के मिश्रित स्वरूप में, दीपचंदी ताल पर आधारित कबीर का भजन “मोरे नैना में श्याम रंग छाए रहियो रे” प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में हारमोनियम पर नितिन लुनिया तथा तबले पर सूर्यकांत सेन ने संगति की। गायन, वादन और भावपूर्ण प्रस्तुति के सुंदर समन्वय ने श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया और कलाकारों को भरपूर वाहवाही मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत विद्यार्थी एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में कहीं सावन के लोकगीतों की मिठास सुनाई दी, कहीं उपशास्त्रीय संगीत की कोमलता, तो कहीं भक्ति और निर्गुण की आध्यात्मिक अनुभूति। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में सीखने की ललक और अपनी सांगीतिक प्रतिभा को मंच पर अभिव्यक्त करने का उत्साह स्पष्ट दिखाई दिया। सावन के इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि भारतीय संगीत में ऋतु केवल प्रकृति का परिवर्तन नहीं, बल्कि भाव, राग, ताल और अनुभूति का उत्सव भी है। कमला देवी संगीत महाविद्यालय के इस सांगीतिक आयोजन ने विद्यार्थियों और कलाकारों को एक साथ सुरों में सावन को जीने और उसका आनंद लेने का सुंदर अवसर प्रदान किया।

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