डॉ.सौरव निर्वाणी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की चर्चा, गांव-गांव की नवधा समिती आएगी एक मंच पर
नवधा मंडलियों का होगा पंजीयन, वाद्य यंत्रों से लेकर बड़े सांस्कृतिक मंच तक उपलब्ध कराने की योजना
रायपुर। छत्तीसगढ़ के गांवों में पीढ़ियों से भगवान श्रीराम की स्तुति के साथ गूंज रही नवधा रामायण की परंपरा को अब संगठित स्वरूप देने ,गांव-गांव में बिखरी नवधा मंडलियों को एक मंच पर लाने के लिए धर्म स्तंभ काउंसिल ने प्रदेश में ‘नवधा महासंघ’ का गठन किया है।
इसी सिलसिले में धर्म स्तंभ काउंसिल के सभापति डॉ. सौरव निर्वाणी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर नवधा महासंघ के गठन की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों पर चर्चा की,नवधा महासंघ का उद्देश्य नवधा की प्राचीन परंपरा को संरक्षित करने के साथ ग्रामीण कलाकारों और मंडलियों को संगठित पहचान तथा व्यापक मंच उपलब्ध कराना है।
गांव की मंडली से बनेगा प्रदेश का सांस्कृतिक नेटवर्क
डॉ. सौरव निर्वाणी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल उसके प्राकृतिक वैभव से नहीं, बल्कि उसकी जीवंत लोक परंपराओं से भी है,नवधा रामायण ऐसी ही परंपरा है, जिसने गांवों में भक्ति, संस्कार और सामूहिक सांस्कृतिक चेतना को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखा है।
उन्होंने कहा, “गांव की चौपालों और मंदिरों में पीढ़ियों से गूंजती नवधा की रामधुन को अब प्रदेशव्यापी पहचान दिलाने का समय आ गया है,हमारा प्रयास है कि हर गांव की नवधा मंडली को जोड़ा जाए और इस परंपरा को एक सशक्त सांस्कृतिक आंदोलन का रूप दिया जाए।”
नवधा मंडलियों का होगा रजिस्ट्रेशन
नवधा महासंघ में प्रदेशभर में सक्रिय नवधा समितियों और कलाकारों का पंजीयन एवं सूचीकरण किया जाएगा,इसके लिए गांव और जिले स्तर पर मंडलियों की जानकारी जुटाकर उन्हें महासंघ के नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।
नवधा मंडलियों को छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग से आवश्यकतानुसार हारमोनियम, पेटी, तबला, ढोलक, मंजीरा, मोहिन्या सहित पारंपरिक वाद्य यंत्र उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा,साथ ही उत्कृष्ट मंडलियों को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुति के अवसर उपलब्ध कराया जाएगा।
संत समाज का मार्गदर्शन
नवधा महासंघ की इस पहल को संत समाज का भी मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है,संरक्षक मंडल में नागा महंत हरिशंकर दास (हरिव्यासी निर्वाणी अखाड़ा), महंत नरेंद्र दास (राष्ट्रीय महामंत्री, निर्मोही अखाड़ा), महंत राम रूप दास महात्यागी (प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय संत समिति, मदकूद्वीप), महंत राधेश्याम दास (सेतगंगा), महंत श्याम दास तथा महंत सुरेंद्र दास (निर्वाणी अखाड़ा, नर्मदा कुंड) को शामिल किया गया है।
संरक्षक प्रेरणा स्रोत दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर एवं गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) स्वामी राजीव लोचन दास ने कहा कि समाज ने नवधा जैसी परंपराओं को सदियों से अपने स्तर पर जीवित रखा है,अब इसे संगठित स्वरूप देकर नई पीढ़ी तक पहुंचाना महत्वपूर्ण प्रयास है।
नर्मदा कुंड के महंत सुरेंद्र दास के अनुसार नवधा महासंघ किसी एक क्षेत्र या संस्था तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले और गांव की नवधा मंडली को एक सांस्कृतिक परिवार से जोड़ना,कलाकारों की पहचान, पारंपरिक विधा का संरक्षण, आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण और बड़े मंचों तक पहुंच चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा।
काउंसिल ने प्रदेश के नवधा कलाकारों, मंडलियों, आयोजकों, सांस्कृतिक संस्थाओं और इस परंपरा से जुड़े समाज के लोगों से इस अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया है।