सहकारिता बनेगी छत्तीसगढ़ की नई आर्थिक शक्ति, राज्य सलाहकार डॉ. सौरव निर्वाणी ने दोहराया संकल्प
*प्राधिकृत अधिकारी सौरभ शर्मा से राज्य सहकारी संघ कार्यालय में हुई विस्तृत चर्चा, स्वयं सहायता समूहों से लेकर सहकारी समितियों तक को सशक्त बनाने की बनी रणनीति*
केंद्र सरकार के सहकारिता मंत्रालय के अधीन कार्यरत सिम्पलीदेसी मल्टीस्टेट कोऑपरेटिव के छत्तीसगढ़ राज्य सलाहकार नियुक्त होने के उपरांत डॉ. सौरव निर्वाणी ने छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के राज्य कार्यालय में सहकारिता विभाग के प्राधिकृत अधिकारी महंत सौरभ दास शर्मा से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डॉ. निर्वाणी ने महंत सौरभ दास शर्मा को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।
दोनों के बीच हुई विस्तृत चर्चा में छत्तीसगढ़ की स्वयं सहायता समूहों, प्राथमिक कृषि साख समितियों, बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों, विपणन, संग्रहण, प्रसंस्करण तथा ग्रामीण आजीविका से जुड़ी संस्थाओं को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन, बाजार उपलब्धता और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की कार्ययोजना पर गंभीर मंथन हुआ। सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने तथा युवाओं और महिलाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करने पर भी सहमति बनी।
डॉ. सौरव निर्वाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के “सहकार से समृद्धि” के विजन को छत्तीसगढ़ में प्रभावी रूप से मूर्त रूप देना उनका लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास, आत्मनिर्भरता और सामूहिक विकास का सबसे सशक्त मॉडल है। यदि स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और ग्रामीण उत्पादक संस्थाओं को संगठित रूप से तकनीकी मार्गदर्शन, विपणन और वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जाए तो छत्तीसगढ़ देश में सहकारिता का अग्रणी राज्य बन सकता है। सिम्पलीदेसी मल्टीस्टेट कोऑपरेटिव इस दिशा में सरकार, सहकारी संस्थाओं और समाज के बीच मजबूत सेतु की भूमिका निभाएगी।
महंत सौरभ दास शर्मा ने कहा कि सहकारिता भारतीय जीवन दर्शन की आत्मा है, जहां व्यक्ति नहीं बल्कि सामूहिक शक्ति विकास का आधार बनती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक सहकारी संस्था को अधिक पारदर्शी, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए शासन, सामाजिक संगठनों और सहकारी संस्थाओं के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. सौरव निर्वाणी के अनुभव, सामाजिक सक्रियता और संगठनात्मक क्षमता से प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा और नई ऊर्जा मिलेगी।
बैठक के दौरान प्रदेशभर में सहकारिता जागरूकता अभियान, स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के विपणन, संग्रहण एवं प्रसंस्करण के लिए आधुनिक मॉडल विकसित करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए संयुक्त पहल करने पर भी सहमति बनी।
इस अवसर पर निर्मोही अखाड़ा के राष्ट्रीय महासचिव महंत नरेंद्र दास जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि सेवा, समर्पण और सहकारिता से प्रदेश और किसानो का विकास होगा
धर्म स्तंभ काउंसिल



