हुई 250 वर्षों की परंपरा से जुड़ी शास्त्रीय संगीत बैठक
विनोद शेष परिवार की सांगीतिक प्रस्तुतियों ने किया मंत्रमुग्ध
रायपुर। राजधानी के प्राचीन सांस्कृतिक क्षेत्र तात्यापारा में विनोद शेष- मिलिंद शेष परिवार द्वारा लगभग 250 वर्षों की परंपरा से जुड़ी शास्त्रीय संगीत की बैठक हुई। रायपुर की सांगीतिक विरासत को समर्पित इस परंपरागत आयोजन में शास्त्रीय संगीत के विभिन्न रंग देखने-सुनने को मिले। इस बैठक की विशेषता यह रही कि इसमें किसी औपचारिक मंचीय आयोजन के बजाय कलाकार सहज सांगीतिक वातावरण में एकत्र हुए और अपनी प्रस्तुतियां से संगीत की समृद्ध परंपरा को उन्होंने आगे बढ़ाया
ढाई सौ वर्षों इस ऐतिहासिक बैठक की परंपरा में अनेक शास्त्रीय संगीत साधक सहज रूप से उपस्थित होकर अपनी प्रस्तुतियां देते रहे हैं। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी विनोद शेष एवं उनके परिवार के प्रयासों से जीवंत है।
इस वर्ष के आयोजन का प्रमुख आकर्षण छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन व संगीत साधक डॉ. अजय नागराज का मोहन वीणा वादन रहा। मोहन वीणा, जिसे स्प्लिट गिटार के नाम से भी जाना जाता है, पर उन्होंने ‘राग देश’ प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में आलाप के पश्चात विलंबित तीनताल में गत, मध्यलय त्रिताल की रचना तथा मध्यलय एकताल में पारंपरिक बंदिश ‘बीत जात बरखा ऋतु, सजना नहीं आए’ शामिल रही। उन्होंने इस बंदिश को गायन और मोहन वीणा वादन के माध्यम से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में उन्होंने द्रुत तीनताल में तराना प्रस्तुत किया।
डॉ. नागराज के मोहन वीणा वादन में प्रख्यात तबला वादक पं. कमल मुखर्जी ने संगत की। उन्होंने अपनी सधी हुई संगत के साथ-साथ विभिन्न टुकड़ों और लयकारी के माध्यम से तबले की विशिष्टताओं को भी प्रदर्शित किया, जिससे वादन की प्रस्तुति और प्रभावशाली बनी। डॉ. दीपक बेडेकर एवं मंजूषा बेडेकर ने भी अपनी सांगीतिक प्रस्तुतियां दीं। डॉ. दीपक बेडेकर, ने राग गोरख कल्याण में बंदिश रघुपति राजीव नयन एवं तराना गाया।
वहीं मंजूषा बेडेकर ने ‘सुमिरन करले प्यारे नाम में हरी समाये भक्ति की महिमा से मन का नारायण हो जाए’ यह प्रसिद्ध भजन गाया।
चंद्रशेखर सुरावधनिवार, प्रो. विजय जोशी, पं. संजय गिजरे, मोहन देसाई, अवतार सिंह धंजल, धनश्री पेडंसे, सुप्रिया शेष, डॉ. नूतन डेगवेकर, अरुंधति पंडित, अश्विन चौहान, प्रदीप तिवारी, दीपक व्यास, सुधीर पंडित, विनोद शेष तथा अन्य सहभागी कलाकारों की भी प्रस्तुतिया हुर्इं। तबला व हारमोनियम संगतकारों में तालमणि अशोक कुर्म, कमल मुखर्जी, राकेश देशमुख, ओम गोल्हानी, अवतार सिंह धंजल, मंजूषा बेडेकर, दीपक व्यास इत्यादि ने संगति की।