तर्रेम क्षेत्र के सिलगेर के जंगल में जोनागुड़ा के पास CRPF की कोबरा, बस्तरिया बटालियन, DRG और STF के करीब 2000 जवान पिछले दो दिनों से अलग-अलग ऑपरेशन पर निकले हुए थे। शनिवार सुबह फोर्स को सूचना मिली कि जोनागुड़ा के पास नक्सलियों का जमावड़ा है। पहले भी यहां सैटेलाइट तस्वीरों में कुछ हलचल दिखाई दे रही थी। यह सूचना फोर्स के पास आई तो जोनागुड़ा का ऑपरेशन अधिकारियों ने प्लान किया। इसके बाद सभी तरह की फोर्स, जो उस समय आसपास के जंगलों में सर्चिंग कर रही थी, उसे मैसेज दिन जाने लगे कि वो जोनागुड़ा की ओर बढ़े।
बस्तर के विशेषज्ञों के मुताबिक जोनागुड़ा का एक इलाका गुरिल्ला वार जोन के अंतर्गत आता है। इसमें गुरिल्ला वार अर्थात छिपकर हमले की रणनीति ही कारगर होती है। यहां कभी भी एक साथ फोर्स नहीं जाती, छोटी-छोटी टुकड़ियों में जाती है। लेकिन सभी फोर्स को इनपुट मिल रहे थे कि नक्सली यहां है, लिहाजा एक के बाद एक फोर्स की टुकड़ियां यहां पहुंचती रहीं। पहले से U शेप में घात लगाकर बैठे नक्सली इसी इंतजार में थे। फोर्स जैसे ही इस जोन में बड़ी संख्या में घुसी, एंबुश में फंस गई। नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग की। मुठभेड़ करीब 5 घंटे चली।
नक्सली ऊपरी इलाकों में थे, फोर्स के एंट्रेंस पर नजर रखे हुए थे, लिहाजा उन्होंने फौज का बड़ा नुकसान किया। कुछ जवानों ने यहां से लगे गांव की ओर पोजिशन के लिए वहां जाने की कोशिश की, लेकिन नक्सलियों ने वहां भी उनका पीछा कर फायरिंग की। नक्सली हमला कर हथियार, सामान लूटते गए और पीछे जंगलों में भागते गए।

