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प्रयासम ने रचाई सावन उत्सव की धूम

रायपुर। प्रगतिशील यादव सखी संवाद मंच ‘प्रयासम’ द्वारा सावन उत्सव का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। हरियाली, लोकगीतों, कजरी की मधुर धुनों, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा यह आयोजन सावन की जीवंतता और नारी शक्ति का खूबसूरत उत्सव बन गया। महिलाओं के लिए मनोरंजक खेल व सांस्कृतिक प्रस्तुतियां के अलावा सावन क्वीन प्रतियोगिता हुई, जिसमें प्रियंका को सावन क्वीन चुना गया। कार्यक्रम का संचालन वंदना ने किया। मुख्य आकर्षण शिव-पार्वती पर आधारित नृत्य नाटिका रही। इसमें अरुणा ने शिव तथा रिंकी ने गौरा की भूमिका निभाई। उनके साथ स्मिता एवं अनीता रविकांत की नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सावन के पारंपरिक महत्व व सामाजिक रिश्तों की खूबसूरती से रूबरू कराने वाली भारती की एकल नाट्य प्रस्तुति तथा सुधा की प्रभावशाली प्रस्तुति को दर्शकों की खूब सराहना मिली और तालियों से पूरा सभागार गूंज उठा। वहीं किरण राजेश, पूजा, सिमरन, नेहा, सुजाता, पूनम, अनीता बृजेश, अनुराधा, स्मिता और रिंकी की नृत्य प्रस्तुतियों ने सावन के उल्लास को और बढ़ा दिया।
संगीत की मधुर प्रस्तुतियों में संध्या, कुसुम एवं रीना के गायन ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। समूह नृत्य में लक्ष्मी यादव, बेबी, आरती, मालती यादव, सुनीता कमल, राधा, चित्रकला, जया, सुनीता अशोक, प्राची, कंचन, विद्या, मधु, किरण शशिकांत, नेहा लक्ष्मण, संगीता, नीलम, सुनीता अमलीडीह एवं साधना जी ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में आयोजित ग्रैंड तंबोला में रेखा यादव विजेता रहीं। मनोरंजक खेल प्रतियोगिता में प्रथम स्थान नेहा द्वितीय स्थान संध्या तथा तृतीय स्थान जया ने प्राप्त किया।
प्रयासम की कार्यकारी अध्यक्षा डॉ. भारती यादव ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि हमारी समृद्ध परंपराओं, लोक संस्कृति और सामाजिक सौहार्द को सहेजने का महत्वपूर्ण प्रयास हैं। सावन भारतीय संस्कृति में प्रकृति, उमंग, प्रेम और नारी शक्ति के उत्सव का प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ महिलाओं को अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता को मंच देने का अवसर भी प्रदान करते हैं।उन्होंने कहा कि सावन की हरियाली केवल प्रकृति को ही नहीं सजाती बल्कि रिश्तों में भी अपनापन, उल्लास और नई ऊर्जा भरती है। प्रयासम का यह आयोजन इसी सामूहिक उल्लास और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की एक सार्थक पहल रहा।

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