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ज्ञानियों को भी मोहित करती है शम्भू की माया: डॉ.स्वामी इंदुभवानंद तीर्थ

रायपुर। श्रीशंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम में शिव पुराण की कथा का विस्तार करते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. इंदुभवानंद तीर्थ ने बताया कि भगवान शंकर की माया ज्ञानियों को भी मोहित कर देती है। नारदजी भगवान शंकर की माया से मोहित हो गए। नारदजी की ज्ञानी भक्तों में गणना होती है। ज्ञानी भक्त भी भगवान की माया से मोहित हो जाते हैं। ज्ञानियों के चित्त को भी महामाया अपनी ओर खींचकर संसार के गर्त में ले जाती है। नारदजी के मन में भी विश्व मोहिनी कन्या के प्रति प्रेम जागा, विवाह करने की इच्छा हुई। कन्या को देखकर नारदजी अपना वैराग्य भूल गये। यह भगवान की ही माया है। इस माया के वशीभूत होकर नारदजी ने भगवान विष्णु को शाप दे दिया तथा भगवान शंकर के गणों को भी शाप दे दिया।


स्वामीजी ने आगे बताया, भगवान विष्णु ने भगवान शंकर की माया की प्रशंसा करते हुए नारदजी के दिए हुए शाप को स्वीकार कर लिया। भगवान शंकर ने अपनी उस विश्व मोहिनी माया को जिसके कारण ज्ञानी नारद मुनि भी मोहित हो गए थे, खींच लिया। उस माया के दूर होते ही नारदजी पूर्ववत शुद्ध-बुद्धि से युक्त हो गए और वह भगवान श्रीनारायण के चरणों में गिर गए। व्याकुल होकर के उन्होंने कहा की मैंने बहुत बड़ा अपराध किया है, भगवान शंकर की अवज्ञा की है। अत: मेरा मन अशांत हो रहा है, आप कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे मेरे हृदय का सुकुमार दूर हो तो भगवान विष्णु ने बताया कि तुम भगवान शंकर के शतनाम की उपासना करो। शतनाम के जप से ही तुम्हारे ह्रदय में शांति प्राप्त होगी।

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मीडिया एमपीसीजी