रायपुर। जहाँ सत्ता और पदों के साथ अकसर भौतिक सुख-सुविधाएँ जुड़ जाती हैं, वहीं छत्तीसगढ़ की राजधानी में सादगी और सनातन मूल्यों की एक अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है,राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त, छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय क्रांतिकारी संत स्वामी राजीव लोचन दास रायपुर स्थित राम-जानकी मंदिर नर्मदा कुंड, निर्वाणी अखाड़ा,के एक साधारण टीन शेड में निवास कर रहे हैं। सुविधाओं के बीच संत का यह तपोनिष्ठ जीवन त्याग, नम्रता और गौसेवा के प्रति अटूट समर्पण का जीवंत संदेश दे रहा है यह कहा धर्म स्तंभ काउंसिल के सभापति डॉ सौरव निर्वाणी ने।
वहीं गौसंरक्षण की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए स्वामी राजीव लोचन दास ने समाज से एक विशेष और भावुक अपील की है उन्होंने कहा प्रदेश भर में गौवंश के सुरक्षित आश्रय के लिए 1,440 गोधाम बनाए जाने हैं, जिसके लिए आवेदनों की आवश्यकता है,स्वामी जी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अपेक्षित संख्या में आवेदन नहीं मिल रहे हैं,उन्होंने समाज, जनप्रतिनिधियों और गौभक्तों से आग्रह किया है कि वे आगे आएँ और गोधाम संचालन के लिए बढ़-चढ़कर आवेदन करें।
स्वामीजी ने कहा, “गाय हमारे लिए केवल पशु नहीं, संपूर्ण सृष्टि की पूज्य पालक माता है,मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार गौसंरक्षण के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है, लेकिन यह लक्ष्य केवल शासन के भरोसे पूरा नहीं हो सकता,जब तक समाज अपनी भागीदारी नहीं निभाएगा, तब तक धरातल पर बड़ा बदलाव संभव नहीं है।”
डॉ सौरव निर्वाणी के साथ वोमेन फॉर वेटलैंड्स की सयोंजिका प्रज्ञा निर्वाणी ने गौधन की सुरक्षा और व्यवस्था पर चर्चा एवं अपनी चिंताओं से अवगत कराया। उन्होंने स्वामीजी से भेंट कर आशीर्वाद लिया और प्रदेश सहित प्रदेश में गौधन की सुरक्षा पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
प्रज्ञा निर्वाणी ने कहा गौधन वास्तविक संरक्षण हो ,गौशालाएँ केवल कागज़ी औपचारिकता न बनें, बल्कि वहाँ गौधन की सेवा और देखभाल सुनिश्चित हो,निराश्रित गौधन की व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त करते हुए सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा गौवंश के लिए स्थायी और सुरक्षित ठिकाना बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है,क्योंकि वाहन चालको के दुर्घटनाओं का मुख्य कारण सड़को पर अचानक आए गौ धन से होता है
जनप्रतिनिधियों के लिए अनुकरणीय मिसाल: डॉ निर्वाणी
धर्म स्तंभ काउंसिल के सभापति डॉ. सौरव निर्वाणी ने कहा कि संत की पहचान उनके निवास की भव्यता से नहीं, बल्कि उनके त्याग और समाज के प्रति समर्पण से होती है,राज्य मंत्री का दर्जा होने के बाद भी एक टीन शेड में रहना स्वामी जी की सादगी को दर्शाता है, जो आज के समय में जनप्रतिनिधियों और समाज दोनों के लिए अनुकरणीय है।



