अध्यात्म • छत्तीसगढ़ • युवाशक्ति

युवा शक्ति के प्रेरक स्वामी विवेकानन्द

रायपुर। संसार का कोई भी बड़ा काम युवाओं के दम पर हुआ है। युवा शक्ति ही राष्ट्र का निर्माण करती है। भारत के लिए यह अच्छी बात है कि अन्य देशों की तुलना में यहाँ युवाओं की सर्वाधिक संख्या है। स्वामी विवेकानन्द का विश्वास केवल युवाओं पर था, वे युवाओं को चरित्रवान बनने की शिक्षा देते थे, चरित्र ही वह कुंजी है जिसमें सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मी समाहित होती है। युवाओं का अपने मन पर जितना नियंत्रण होगा उनका व्यक्तित्व उतना ही उन्नत होगा। युवाओं को अपने जीवन गठन के लिए एक लक्ष्य का निर्धारण कर निरंतर उसमें आगे बढ़ते रहना चाहिए, अच्छे कार्य को करने पर व्यवधान स्वाभाविक है, पर उससे विचलित हुए बिना अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए। हमारी युवा शक्ति आज अपना अतीत भूलकर पाश्चात्य का अंधानुकरण कर रहे हैं जिसके कारण उनमें तनाव अधिक है। उन्हें हनुमान जी की तरह उनके शक्ति का बोध कराना होगा, उन्हें आत्म-विश्वास की शिक्षा देनी होगी। युवाओं को रील लाईफ से हटकर रीयल लाईफ की ओर बढ़ना होगा। भारत की रीढ़ अध्यात्मिकता है इसलिए युवाओं को धर्म के जोड़ना होगा, उन्हें बताना होगा कि किसी धर्म का अनुयायी होना धर्म नहीं है, अपितु अपने अंदर की दिव्यता को उभारना ही आध्यात्मिकता है। उन्हें बताना होगा कि भगवान उनकी की सहायता करते हैं जिन्हें अपने ऊपर विश्वास होता है। उन्हें महान बनाने के लिए एकाग्रता की शिक्षा देनी होगी, क्यों कि एकाग्रता ही महानता की पहली सीढ़ी है। इसीलिए वर्तमान के एआई में भी हमारे धर्म गुरुओं की सहायता से धर्म और दर्शन की शिक्षा को डालने का प्रयास किया जा रहा है। हमारी बहनों को मातृत्व, सहिष्णुता, दयालुता और एकात्मबोध की शिक्षा देनी होगी। मानव जीवन का उदेश्य रोटी, कपड़ा और मकान के अतिरिक्त त्याग और सेवा की भी है, क्यों कि यही दो भारत का राष्ट्रीय आदर्श है। स्वामी विवेकानन्द के उक्त आदर्शों को सुनने, बोलने की अपेक्षा जीवन में उतारना ज्यादा महत्वपूर्ण है। यदि हमारे युवासाथी उक्त बातों को अपने जीवन में उतार ले तो निश्चित ही हमारा भारत सन् 2047 तक विश्वगुरू बन कर पूरी दुनिया का नेतृत्व करेगा। उक्ताशय के विचार छत्तीसगढ़ शासन, संस्कृति विभाग और विवेकानन्द विद्यापीठ, रायपुर द्वारा आयोजित द्विदिवसीय ‘विवेकानन्द युवा-सम्मेलन-2026’ में विभिन्न प्रदेशों से आये हुए विद्वान वक्ताओं के द्वारा व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम में विभिन्न 4 सत्रों में बेलूरमठ के स्वामी सर्वभूतानन्द, केरल के स्वामी नरसिम्हानन्द, भोपाल के स्वामी नित्यज्ञानानन्द, इंदौर के स्वामी निर्विकारानन्द के अतिरिक्त रायपुर के स्वामी प्रपत्यानन्द, स्वामी सर्वप्रदानन्द डॉ. आशा जैन तथा डॉ. ओमप्रकाश वर्मा ने संबोधित किया। विभिन्न सत्रों का संचालन डॉ प्रीति विश्वकर्मा, मनोज यादव तथा मनीषा चन्द्रवंशी ने किया। कार्यक्रम में दिशा कॉलेज, प्रगति कॉलेज, विवेकानन्द इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन, विवेकानन्द इंस्टिट्यूट फार ह्यूमन एक्सीलेंस, विवेकानन्द विद्यापीठ आदर्श आवासी विद्यालय के युवा छात्रों सहित नगर के गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।

About the author

मीडिया एमपीसीजी