- सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
- देश के युवाओं और न्याय की जीत*
- सुप्रीम कोर्ट ने किया अनुच्छेद 142 में प्रदत असाधारण शक्ति का प्रयोग
- लोकतंत्र में संविधान जनता की ताकत – भगवानू
रायपुर, छत्तीसगढ़, दिनांक 2 सितंबर 2026। सामाजिक न्याय कार्यकर्ता व अधिवक्ता भगवानू नायक ने कहा सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 की असाधारण शक्ति का प्रयोग करते हुए NEET परीक्षा 2026 से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज FIRs को रद्द करने का निर्देश दिया है तथा आत्महत्या करने वाले छात्र छात्राओं के परिवारों के लिए देशव्यापी मुआवजा नीति बनाने का निर्देश दिया है। NEET पेपर लीक के विरोध में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए आंदोलन करने वाले देशभर के विद्यार्थियों के विरुद्ध दर्ज FIR को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला स्वागतयोग्य एवं ऐतिहासिक है। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा संविधान के अनुच्छेद 142 में प्रदत्त असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूर्ण न्याय के उद्देश्य से NEET परीक्षा से संबंधित आंदोलन के दौरान दर्ज FIRs को बंद करने तथा उन मामलों में आगे की कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला इस बात का महत्वपूर्ण संदेश है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाना अपराध नहीं है। छात्र छात्राओं का भविष्य किसी भी प्रकार के आपराधिक मुकदमे के बोझ तले दबना नहीं चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय युवाओं के संवैधानिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्याय की भावना को मजबूती प्रदान करता है। इसके साथ ही NEET परीक्षा की पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों के लिए पूरे देश में एक समान मुआवजा नीति तैयार करने और उसे निर्धारित तीन महीने के समय-सीमा में लागू करने का निर्देश दिया जाना भी अत्यंत संवेदनशील एवं मानवीय पहल है। ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ न्याय और सम्मान मिलना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन करते है । यह फैसला केवल FIR समाप्त करने का आदेश नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि देश के युवाओं की आवाज सुनी जाएगी, उनके भविष्य की रक्षा की जाएगी और अन्याय की स्थिति में संविधान उनके साथ खड़ा है। केंद्र एवं सभी राज्य सरकारों से आग्रह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के अनुरूप छात्र-छात्राओं के विरुद्ध लंबित मामलों को तत्काल समाप्त करने तथा प्रभावित परिवारों को समयबद्ध तरीके से मुआवजा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करें।



