नवकार नगर में नवपदजी ओली आराधना का ऐतिहासिक शुभारंभ
11 लकी कूपन निकले, पार्श्वनाथ तीर्थ की यात्रा पर जाएंगे चयनित तपस्वी
रायपुर। नवकार नगर स्थित श्रीमुनि सुब्रत स्वामी जिनालय में रविवार को नवपदजी ओली आराधना के प्रथम दिन सामूहिक आयंबिल का आयोजन हुआ। इसमें 300 तपस्वियों ने एक साथ आयंबिल तप किया। नवकार नगर में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से यह आराधना की। जिनालय परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही रही और वातावरण भक्ति एवं तप-साधना से सराबोर रहा।
आयंबिल के दौरान तपस्वियों का साफा पहनाकर, श्रीफल एवं माला भेंटकर बहुमान किया गया। इस अवसर पर मुनिश्री सत्वरत्न सागर महाराज ने आराधकों को राजा श्रीपाल और मैना सुंदरी की प्रेरक कथा विस्तार से सुनाई।
जैन परंपरा में श्रीपाल-मैना सुंदरी की कथा नवपद आराधना और आयंबिल ओली की महिमा से जुड़ी है। कथा के अनुसार, मैना सुंदरी कर्म-सिद्धांत में दृढ़ विश्वास रखती थीं। उनका मानना था कि जीवन के सुख-दु:ख और परिस्थितियों का संबंध व्यक्ति के कर्मों से होता है। अनेक कठिनाइयों के बीच भी उन्होंने धर्म और संयम का मार्ग नहीं छोड़ा। कथा में बताया गया कि राजा श्रीपाल रोग से पीड़ित थे। मैना सुंदरी ने गुरुजनों का मार्गदर्शन लेकर नवपद की आराधना और आयंबिल तप का आश्रय लिया। इस प्रसंग के माध्यम से मुनिश्री ने तप, श्रद्धा, संयम और कर्म-सिद्धांत के महत्व पर प्रकाश डाला। यह कथा जैन परंपरा में नवपद आराधना से जुड़ी प्रेरक कथा के रूप में कही जाती है।
मुनिश्री ने बताया कि आयंबिल में स्वाद और आहार पर संयम रखते हुए आत्मशुद्धि तथा धर्म-साधना का भाव प्रमुख रहता है। नवपदजी ओली के नौ दिनों में आराधक नवपद के गुणों का स्मरण करते हुए तप और संयम का अभ्यास करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान 11 लकी कूपन निकाले गए। कूपन में चयनित 11 भाग्यशाली तपस्वियों को अंतरिक्ष पार्श्वनाथ तीर्थ की यात्रा कराई जाएगी।
300 तपस्वियों की सामूहिक भागीदारी और आराधकों के उत्साह ने आयोजन को विशेष बना दिया। श्रद्धालुओं ने इसे जिनशासन की प्रभावना और सामूहिक तप-साधना की प्रेरक शुरूआत बताया।