छत्तीसगढ़ धर्म रायपुर

गलती मान लेने से पाप धुल जाते हैं, लेकिन स्वीकारते कहां हैं: संत शंभूशरण

जिसने बचपन में भक्ति नहीं की, वह बुढ़ापे में कभी भक्ति नहीं कर सकता

रायपुर। मैक कॉलेज आॅडिटोरियम समता कॉलोनी में जीवन दर्शन को श्रीराम कथा से जोड़कर कई सारगर्भित बातें बताते हुए संत शंभूशरण लाटा महाराज ने कहा, गलती मान लेने से आपके पाप धुल जाते हैं, लेकिन आज का प्राणी गलत मानने को तैयार ही नहीं होता है। भय से जीव भगवान की भक्ति करता है और जिसके अंदर भय नहीं है, उस जीव का नाश हो गया। जिसने बचपन में भक्ति नहीं की, वह बुढ़ापे में कभी भक्ति नहीं कर सकता। श्रीराम कथा तो गंगा है, उसमें समाहित होकर तो देखो। भगवान से डर लोगे ना तो किसी और से डरने की आवश्यकता नहीं है। आज का समय तो छप्पन भोग वाला है। यदि प्रेम नहीं हैं तो क्या भगवान छप्पन भोग स्वीकारेंगे।

उन्होंने कहा कि आज लोग अपनी गलती भी नहीं स्वीकारते हैं। देवी अहिल्या ने अपनी गलती स्वीकार की थी, इसलिए भगवान राम ने उनका उद्धार किया। पाप और पुण्य दोनों छिपाने से बढ़ते हैं और सामने कर दो तो घटते हैं। हम काम कितना करते है, भजन कितना करते हैं, सबको बताते हैं, लेकिन हमने पाप कितना किया है वह भगवान से कभी छिपा नहीं सकते हैं, हमारा बस चले तो हम भगवान को भी पता नहीं लगने दें। स्वीकार करना मुश्किल नहीं है लेकिन हमारा स्वीकारना मुश्किल है। कोई चूक, भूल या गलती हो जाए तो उसका हिसाब करते रहें क्योंकि छोटे-छोटे पाप हमसे हमेशा होते रहते हैं और छोटे पाप का छोटा प्रायश्चित होता है। पहले जब किसी गांव में चीटी मर जाती थी तो लोग खड़े होकर राम-राम कहते थे और यही छोटा प्रायश्चित होता था उन लोगों का, क्योंकि भगवान के नाम में बहुत शक्ति है।


लाटा महाराज ने बताया कि राम कथा तो गंगा है क्योंकि जब पुराने लोग स्नान करते थे तो बोलते थे हर-हर गंगे लेकिन आज-कल यह परंपरा छूटने लगी है। क्या लगता है जब आप नहाते समय दो-तीन बार हर-हर गंगे का स्मरण कर लो आपके पाप कटने लग जाते हैं। गंगा में स्नान करने से पाप और कष्ट मिट जाते हैं। वैसे ही श्रीराम कथा में सच्चे मन से गोते लगा लो आपके दु:ख दूर हो जायेंगे।

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