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छत्तीसगढ़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में अग्रणी है: डॉ. राजीव ज्ञानी

विश्व मानक दिवस पर तकनीकी प्रस्तुतिकरण पर हुई चर्चा

रायपुर। द इंस्टीट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स (इंडिया), छत्तीसगढ़ राज्य केंद्र द्वारा जीईसी- एनआईटी रायपुर एलुमनी एसोसिएशन के सहयोग से शनिवार को ‘विश्व मानक दिवस’ के अवसर पर एक तकनीकी प्रस्तुतिकरण एवं चर्चा का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि क्रेडा रायपुर के पूर्व अधीक्षण अभियंता डॉ. राजीव ज्ञानी ने कहा, छत्तीसगढ़ अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में अग्रणी है। उन्होंने आगे कहा कि सौर ऊर्जा, आॅफ-ग्रिड घरेलू प्रणालियों से लेकर मिनी-ग्रिड तक, ऊर्जा की सुरक्षा और संक्रमण की समस्याओं का समाधान एक साथ कर सकती है।

उन्होंने आगे कहा, सौर मॉड्यूल, बैटरियों और इन्वर्टरों की मानकीकृत गुणवत्ता जांच विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकॉनोमी) की आवश्यकता का पक्ष रखते हुए बताया कि उद्योग सबसे अधिक ऊर्जा खपत वाला क्षेत्र है और उसके पश्चात परिवहन तथा व्यावसायिक एवं आवासीय क्षेत्र में ऊर्जा की खपत होती है। छत्तीसगढ़ राज्य ने इस विषय में काफी पहले कदम उठा लिए थे इसलिए सौर ऊर्जा का इस प्रदेश में एक वृहत नेटवर्क तैयार है।

इसी कड़ी में विशिष्ट अतिथि वक्ता, भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) रायपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रणीत कुमार रॉय ने ऊर्जा दक्षता पर जोर देकर कहा कि इसको अपनाने से हमें स्वच्छ और सस्ती बिजली मिलने का लक्ष्य हासिल होगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की ओर संकेत करते हुए कहा कि यहां भिलाई इस्पात संयंत्र, इस्पात तथा एल्युमीनियम और सीमेंट जैसे ऊर्जा-गहन उद्योग स्थित हैं और यहां ऊर्जा दक्षता बहुत मायने रखती है।

उन्होंने अपने प्रस्तुतिकरण में बताया कि 2023 में विश्व के लगभग 66 करोड़ लोग बिजली सुविधा से वंचित थे तथा लगभग 2.1 अरब लोग अब भी स्वच्छ खाना पकाने के साधनों से वंचित हैं। इस कारण 2030 के लक्ष्यों—नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने और दक्षता में सुधार की गति को दोगुना करने की दिशा में विश्व अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2025 में भारत की स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों का योगदान 50 प्रतिशत को पार कर गया, जो राष्ट्रीय लक्ष्य से पांच वर्ष पहले हासिल हुआ है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में द इंस्टीट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स (इंडिया) के छत्तीसगढ़ राज्य केंद्र के अध्यक्ष पुनीत चौबे ने अपने स्वागत उद्बोधन में द इंस्टीट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स की गतिविधियों और उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। जीईसी- एनआईटी रायपुर एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष उमेश चितलांगिया ने द इंस्टीट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स (इंडिया), छत्तीसगढ़ राज्य केंद्र को इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा आयोजित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में पहले ही पहल कर चुका है और सभी स्टेक होल्डर्स की सहभागिता हेतु हमें संयुक्त प्रयास करना होगा।

कार्यक्रम का संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यकारिणी सदस्य डॉ. के.के. घोष ने किया। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के डीन डॉ. वी.के. पांडेय, छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड के पूर्व मुख्य अभियंता वी.के. कासू, के.के. वर्मा, रविशंकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार, इंस्टीट्यूशन आॅफ इंजीनियर्स (इंडिया) छत्तीसगढ़ राज्य केंद्र तथा जीईसी- एनआईटी रायपुर एलुमनी एसोसिएशन के वरिष्ट अभियंता सदस्य, एनआईटी रायपुर के संकाय सदस्य उपस्थित थे।

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