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तीन दिवसीय फोटो प्रदर्शनी के अंतिम दिन बच्चों, विद्यार्थियों एवं आमजन ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा

 

नन्हे बच्चों ने अपनी कलम और रंगों से उकेरी वर्षों पुरानी जनजातीय संस्कृति

रायपुर। छत्तीसगढ़ की अद्भुत एवं विविध जनजातीय संस्कृति पर आयोजित तीन दिवसीय विशेष फोटो प्रदर्शनी के अंतिम दिन नन्हे बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों ने अपनी नन्ही कलम और रंगों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की वर्षों पुरानी जनजातीय सभ्यता, रहन-सहन, खानपान, वेशभूषा एवं सांस्कृतिक परंपराओं को चित्रों में जीवंत रूप देने का प्रयास किया।

बच्चों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर जनजातीय जीवनशैली और संस्कृति को समझा तथा उसे अपनी कल्पनाओं के रंगों के माध्यम से कागज पर उकेरा। प्रदर्शनी में गणमान्य नागरिकों, विद्यार्थियों, जनसमूह एवं नन्हे बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के विविध पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।

प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों, लोकजीवन, लोककलाओं, पारंपरिक वेशभूषा, आस्था, उत्सवों एवं सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें दीपेंद्र दीवान एवं अखिलेश भरोस (रायपुर), रजनीश पाणिकर (बस्तर) तथा धनैश्वर साहू (जशपुर) द्वारा खींचे गए छायाचित्र विशेष रूप से प्रदर्शित किए गए।

जनजातीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान को सामने लाती हैं तस्वीरें : डॉ. संजय कनोजे
संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कनोजे ने कहा कि इन छायाचित्रों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातियों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, उनकी जीवनशैली, परंपराओं तथा प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध को दर्शाने का प्रयास किया गया है। दुर्लभ एवं जीवंत तस्वीरें दर्शकों को प्रदेश की बहुरंगी जनजातीय संस्कृति से रूबरू करा रही हैं।

सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी : प्रभात सिंह
इस अवसर पर पुरातत्व विभाग के श्री प्रभात सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता है, ताकि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंच सके। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और उसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

केवल फोटो प्रदर्शनी नहीं, सांस्कृतिक विरासत को समझने का प्रयास : दीपेंद्र दीवान
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक दीपेंद्र दीवान ने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल छायाचित्रों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय विरासत, लोकजीवन और सांस्कृतिक विविधता को समझने एवं महसूस करने का एक प्रयास है। इसका उद्देश्य आमजन, युवाओं, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कलाकारों तथा फोटोग्राफी एवं संस्कृति प्रेमियों को प्रदेश की समृद्ध जनजातीय परंपराओं से परिचित कराना है।

सांस्कृतिक अभियान से जुड़ने का आह्वान
फोटो सहयोगी अखिलेश भरोस ने कहा कि यह आयोजन कला, संस्कृति एवं जनजातीय विरासत में रुचि रखने वाले नागरिकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, कलाकारों एवं फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने सभी से प्रदर्शनी में उपस्थित होकर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली जनजातीय विरासत का अवलोकन करने तथा इस सांस्कृतिक अभियान का सहभागी बनने का आग्रह किया।

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