दुख हमें अपने पिछले जन्मों के कर्मों के कारण होता है
रायपुर। मैक कॉलेज आॅडिटोरियम में जारी शुक्रवार के श्रीराम कथा सत्संग में संत शंभूशरण लाटा महाराज ने कहा, दुनिया में सारा झमेला तो रुपयों का है, जिनका दिल रुपयों में लगा है वह भगवान का भजन क्या करेगा, उसका भगवान के प्रति प्रेम कहां होगा। आज की दुनिया ऐसी है कि रुपयों से रिश्ता जोड़ते हैं लोग। जिंदगी तो भगवान ने दी है लेकिन एक दिन सबको छोड़कर जाना पड़ेगा। राग रखना है तो भगवान से रखो, रुपयों से नहीं। जो जीते जी अपने आनंद को मार दे उसे मौत क्या खाक मारेगा? भगवान का नाम सुमिरन करो, सारे पाप कट जायेंगे।
महाराजश्री ने अयोध्या से भगवान राम के वनगमन प्रस्थान की बड़ी ही मार्मिक व्याख्या की। प्रेम देखना हो तो मानस में श्रीराम के प्रति सीता व लक्ष्मण का प्रेम देखें। वनवास का आदेश तो केवल श्रीराम को हुआ था लेकिन जब इन दोनों को अयोध्या में रहकर माता-पिता व राज्यवासियों की सेवा करने की बात कही तो उन्होंने केवल यह कहा कि बिना प्राण के शरीर से सेवा कैसे होगी। प्रेम को शब्दों से बांधा नहीं जा सकता, प्रेम में समर्पण होता है जिसे आंखों में ही देखकर माता-पिता गुरु समझ लेते हैं कि भक्त के मन में क्या है?
उन्होंने प्रसंगवश ये भी बताया कि आज तो सेवा व भजन भी अपनी मर्जी से नहीं होती है। जिन्होंने दिल रुपये पैसों को दे रखा है उसके बारे में क्या कहना? जिनके पास ज्यादा होगा वह ज्यादा और जिनके पास कम होगा वह कम रोयेगा। लेकिन जिनके पास है ही नहीं वह क्या रोयेगा। ऐसे लोगों का राग केवल भगवान के प्रति होता है। ये रुपया ही सारा झमेला है। प्रेम,भक्ति व सेवा की बात है तो माता सुमित्रा ने लक्ष्मण से कहा कि वन में केवल इतना करना कि राग, द्वेष, ईर्ष्या, अहंकार व क्रोध से दूर रहना। केवल और केवल अनुराग प्रभु के प्रति ही रखना।
संत श्री लाटा महाराज ने बताया कि कोई किसी को सुखी-दुखी क्या करेगा, हमें किसी के कारण से दु:ख नहीं होता है। दुख हमें अपने पिछले जन्मों के कर्मों के कारण होता है। हम दूसरे पर तो दोष लगाते हैं पर अपने कर्मों की बात नहीं करते। कष्ट आए तो कैसे सहना चाहिए यह भगवान राम ने अपने वन गमन के दौरान बताया है। जो शक्ति राम में है-महादेव में है वही शक्ति भगवान के नाम में भी हैं। कभी भी यात्रा पर जाओ तो अपने ईष्टदेव का नाम लेकर जाओ, उन्हें बताकर जाओ तो आने वाली संभावित बाधा दूर हो जायेगी। कलयुग में यदि कुछ है तो वह है भगवान का नाम। सत्य ही धर्म है, वेद पुराणों में बताया गया है।