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श्रद्धा-भक्ति और विशेष पूजन कर मनाया गया करपात्री महाराज जयंती और वर्धयन्ती महोत्सव

शंकराचार्य आश्रम में बोरियाकला में अनुष्ठान

रायपुर। श्रीजगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम में करपात्री महाराज का जयंती दिवस एवं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का वर्धयन्ती महोत्सव उनके दीर्घायु होने की कामना के साथ यतिप्रवर दण्डी स्वामी इंदुभवानंद तीर्थ महाराज के सानिध्य में मनाया गया।
शुक्रवार, 14 अगस्त के इन विभिन्न अनुष्ठानों के अंतर्गत प्रात:काल से ही भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुन्दरी का पूजन कर भगवान सिद्धेश्वर का अभिषेक किया गया। तदुपरांत भक्तों ने भगवान शिव के पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक 51 किलो दूध एवं गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदे, सिन्धु, कावेरी इन सप्त नदियों के जल से किया गया। साथ ही गुरु, परम गुरु, परात्पर गुरु, परमेष्ठी गुरु की परम्परा का पूजन भी हुआ।


सायंकालीन सत्र में डॉ. इंदुभवानंद तीर्थ महाराज ने बताया की स्वामी करपात्री महराज एवं ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का भी आज ही के दिन अवतरण हुआ, यह सहज संयोग है की दोनों की जन्मभूमि प्रतापगढ़-उत्तरप्रदेश है। दोनों का निवास भी वर्तमान में केदारघाट वाराणसी में है। दोनों का संकल्प भी एक ही है- गौरक्षा एवं गौसेवा। स्वामी करपात्रीजी ने जीवन पर्यन्त गोरक्षणार्थ कार्य किया एवं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदजी आज भी गौ सेवा के लिए प्राण-पन से लगे हैं। भीषण गर्मी में वृन्दावन से दिल्ली तक पद यात्रा निकाली। अपने सुख-सुविधा का परित्याग करके समस्त भारत की राजधानियों में गोध्वज की स्थापना भी की। अभी-अभी उत्तरप्रदेश की 403 विधानसभा में गौ प्रतिष्ठा गविष्ठी यात्रा भी उन्होंने की। अभी भी गाय की रक्षा के लिए बड़े-बड़े यज्ञ कर रहे हैं। वर्तमान में शंकराचार्य महराज का चातुर्मास बेमेतरा के अंतर्गत सलधा नामक क्षेत्र में चल रहा है।

यहां भी वे 45 दिनों तक गौ माता की रक्षा के लिए गो प्रतिष्ठा यज्ञ करने जा रहे हैं। कुम्भ में भी उन्होंने 11 हजार ब्राह्मणों का समागम करके गौ प्रतिष्ठा यज्ञ का आयोजन किया। राम जन्मभूमि के लिए भी शंकराचार्यजी का अद्वितीय योगदान भुलाया नहीं जा सकता। जब भी राम जन्मभूमि की बात आएगी, उनको याद किया जाएगा। क्योंकि जब हिन्दुओं को सुनने की बात आई तो केवल 25 दिन तक स्वामीजी की बात सुनी गई और उनके बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि के पक्ष में निर्णय सुनिश्चित किया। इसलिए आज उनकी जन्म जयंती पर हम सभी पराम्बा भगवती से प्रार्थना करते हैं कि वे सदा-सर्वदा इसी प्रकार से सनातन धर्म की रक्षा के लिए सन्नद्ध रहें।

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