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रायपुर के संगीत विद्यार्थियों ने तिरुपति में दी कथक प्रस्तुति

तिरुपति बालाजी के ‘नादनीराजनम’ मंच पर गूंजी श्रीराम की गाथा

कमलादेवी महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने बांधा समा, भक्तगण झूमे

रायपुर। विश्वप्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर परिसर स्थित प्रतिष्ठित ‘नादनीराजनम’ मंच पर 28 सितंबर की शाम धर्म, कला और भक्ति के अनूठे संगम की साक्षी बनी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित कमलादेवी संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने प्राचार्य डॉ. आरती सिंह के नेतृत्व में भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पावन जीवन चरित्र पर आधारित कथक नृत्य-नाटिका रामायण की मनोहारी प्रस्तुति देकर देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं और कला-प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कथक के शास्त्रीय स्वरूप, सशक्त अभिनय, मधुर संगीत और भाव-प्रवण भावभंगिमाओं के माध्यम से कलाकारों ने भगवान राम के संपूर्ण जीवन वृत्त को जीवंत कर दिया। यह प्रस्तुति कथा मंचन के साथ सत्य, त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और सदाचार के उन अमर मूल्यों का साक्षात दर्शन थी, जो सदियों से मानव सभ्यता को प्रेरित करते आ रहे हैं।

अहिल्या उद्धार से राज्याभिषेक तक सजीव हुआ रामकथा का सफर

नृत्य-नाटिका की शुरूआत अयोध्या के राजकुमार श्रीराम के पावन जीवन प्रसंगों से हुई। कलाकारों ने अहिल्या उद्धार, जनकपुरी में शिव धनुष भंग और सीता स्वयंवर के उल्लास को कथक की लयबद्ध चाल और चक्करों के साथ खूबसूरती से पेश किया।

रामराज्य की परिकल्पना साकार

कथा के आगे बढ़ने पर वनवास यात्रा के संवेदनशील और मर्मस्पर्शी प्रसंगों- पंचवटी में निवास, माता शबरी की अनन्य भक्ति, स्वर्ण मृग का प्रलोभन, सीता हरण और धर्म की रक्षा में गिद्धराज जटायु के बलिदान को कलाकारों के सधे हुए अभिनय ने अत्यंत मार्मिक बना दिया। अंत में रावण वध, माता सीता की पुनर्प्राप्ति, प्रभु का ससम्मान अयोध्या आगमन और भव्य राज्याभिषेक के साथ न्याय व धर्म पर आधारित ‘रामराज्य’ की परिकल्पना को मंच पर साकार कर नृत्य-नाटिका का भावपूर्ण समापन हुआ।

इन कलाकारों ने बिखेरी कला की आभा

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आरती सिंह के निर्देशन और मार्गदर्शन में दल के युवा व अनुभवी कलाकारों ने मंच पर अपनी उत्कृष्ट कला का लोहा मनवाया। प्रस्तुति में डॉ. आरती सिंह के साथ हरीश वट्टी, सनोवर खान, चिरंजीवी हलधर, नरेंद्र जलक्षत्रिय, इशिका गिरी, खुशी सिंह, दीपिका चतुर्वेदी, उषा शर्मा और शिखा सिन्हा ने प्रमुख भूमिकाएं निभार्इं। कलाकारों के बीच का तालमेल, सटीक पदचाप और नवरसों की सजीव प्रस्तुति ने नादनीराजनम मंच पर उपस्थित भक्तों को खड़े होकर तालियां बजाने पर विवश कर दिया। मंदिर प्रबंधन और श्रद्धालुओं ने छत्तीसगढ़ के कलाकारों की इस शास्त्रीय प्रस्तुति की मुक्तकंठ से सराहना की।

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मीडिया एमपीसीजी