छत्तीसगढ़ • रायपुर

जैनम मानस भवन में रास गरबा उत्सव, श्वेत परिधानों उतरे भक्त

रायपुर। ‘रंगीलो रास गरबा’ संस्था के तत्वावधान में विमानतल के नजदीक जैनम मानस भवन के विशाल प्रांगण में ‘सफेद रायपुरियंस’ शीर्षक से आयोजित भव्य पारंपरिक डांडिया और गरबा उत्सव सोमवार को पूरी भव्यता और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। संस्थापक निलेश मुंधड़ा ने बताया, इस आयोजन में सबसे अलौकिक और जादुई विशेषता इसका अनोखा ड्रेस कोड रहा। संस्था द्वारा गरबा खेलने आए माता के सभी भक्तों और शहरवासियों को विशेष रूप से केवल सफेद पारंपरिक परिधानों में आमंत्रित किया गया था। जब हजारों की संख्या में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग श्वेत वस्त्र धारण कर पंडाल में उतरे, तो ऐसा लगा मानो धरती पर साक्षात शरद पूर्णिमा की चांदनी बिखर गई हो। इस अनूठे सांस्कृतिक महासंगम को सफल बनाने में आयोजन समिति के संस्थापक मुंधडा समेत कपिल दोषी, मारुति काबरा, सीए अमित राठी, राजीव मुंदडा, आर्या दुबे, राम वाधवानी, अणुव्रत खटोर, अमर धिंगानी, शरद सारडा, विकास आहूजा और राकेश अग्रवाल की महती भूमिका रही।

  • एक शहर, एक रंग की अनूठी एकता: जब पूरा पंडाल एक ही रंग के समंदर में डूबा नजर आया, तो उसने रायपुर शहर की अखंडता, सामूहिक शक्ति और सामाजिक समरसता का एक ऐसा अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया, जिसे देख हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया।
  • शांति, दिव्यता और पवित्रता का प्रतीक: सफेद रंग मां आदिशक्ति की भक्ति में आध्यात्मिक शुद्धता, सात्विकता और परम मानसिक शांति का संचार कर रहा था। डांडिया की खनक और डांडिया स्टेप्स के साथ श्वेत वस्त्रों का तालमेल दिव्य ऊर्जा का अहसास करा रहा था।
  •  समानता और सादगी का संदेश: यह रंग समाज में समानता, निश्छलता और सकारात्मक ऊर्जा को प्रदर्शित करता है। ऊंच-नीच और भेदभाव से परे, हर भक्त सिर्फ माँ की भक्ति के एक ही रंग में रंगा हुआ नजर आया।

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मीडिया एमपीसीजी