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गुरु पूजन की विविध विधाओं पर दी गई भावमयी नृत्य प्रस्तुतियां

महर्षि वाल्मीकि सभागार में छाई ‘शरदोत्सव’ की बहार 

गुरु के विशाल हृदय और जीवदया को मुनि आगम सागर ने बताया प्रेरणास्रोत

रायपुर। समाधिस्थ राष्ट्रसंत आचार्यश्री विद्यासागर महाराज और वर्तमान परंपराचार्य आचार्यश्री समयसागर महाराज के अवतरण महापर्व के अवसर पर रविवार को रायपुर में दो दिवसीय महोत्सव ‘शरदोत्सव वर्ष 2026’ की शुरूआत हुई।

आयोजन की शुरूआत ब्रह्मचारी सुनील भैया के निर्देशन में श्रीभक्तामर पाठ से हुई। श्री राम मंदिर परिसर स्थित वाल्मीकि सभागार, वीआईपी रोड में हुए इस धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम में भक्ति, नृत्य, पूजन और गुरु-वंदना के साथ ‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण’ समारोह भी हुआ। जीवदया और गौवंश संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए दयोदय महासंघ को सम्मानित किया गया। महासंघ की ओर से अध्यक्ष सतना के प्रेमचंद जैन ‘प्रेमी’ ने सम्मान ग्रहण किया।

महोत्सव मुनिश्री आगम सागर, मुनिश्री पुनीत सागर महाराज, ऐलकश्री धैर्य सागर और ऐलकश्री स्वागत सागर महाराज के मंगल आशीर्वाद और सानिध्य में मनाया गया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से दिगम्बर जैन समाज के लोगों ने इसमें सहभागिता निभाई।

गुरु का हृदय विशाल है, सभी को स्वीकार करना उनकी विशेषता: मुनि आगम सागर

मंगल प्रवचन के दौरान मुनिश्री आगम सागर महाराज ने आचार्यश्री विद्यासागर के व्यक्तित्व और उनकी उदारता का उल्लेख करते कहा, गुरु का हृदय कोमल है और आचार्यश्री विद्यासागर महाराज का हृदय इतना विशाल है कि वे सभी को स्वीकार कर लेते हैं। उनके शिष्य होने के नाते हमारा हृदय भी बड़ा हुआ है। हमें इस बात की खुशी है कि हम सभी को स्वीकार करते हैं।

जीवदया के महत्व पर बात रखते हुए उन्होंने कहा, सड़क पर घूमने वाली गायों को आश्रय देने और उन्हें छत उपलब्ध कराने वालों को आज सम्मानित किया गया है। यह गर्व की बात है। जीवों की रक्षा और उनके लिए सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था करना करुणा और सेवा का महत्वपूर्ण कार्य है।

नृत्य प्रस्तुतियों के जरिए की गई गुरुदेव की भव्य स्तुति

कार्यक्रम में गुरुदेव के भव्य पूजन को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिनालयों से आए महिला मंडलों ने नृत्य के माध्यम से पूजन के अलग-अलग चरणों की प्रस्तुति दी। इसमें स्थापना, जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फल और अर्घ्य सहित विभिन्न धार्मिक विधियां शामिल रहीं। आचार्यश्री समयसागरजी एवं संतश्री ज्ञानसागर के वंदन स्वरूप जयमाला कार्यक्रम और मुनिश्री आगम सागर व मुनिश्री पुनीत सागर के गुरुपूजन विधान के साथ विसर्जन और आरतियों की प्रस्तुतियां भी दी गर्इं।

नत्य और भक्ति के संगम से हुई इन प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। पूजन के माध्यम से महिला मंडलों ने धार्मिक भावनाओं और गुरु के प्रति श्रद्धा को कलात्मक रूप में व्यक्त किया।

नृत्य में राजनांदगांव के महिला मंडल को पहला स्थान

पूजन की विविध विधाओं पर हुई नृत्य प्रतियोगिता में श्रीनेमिनाथ जिनालय आदर्श महिला मंडल, राजनांदगांव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। श्रीमहावीर दिगंबर जैन मंदिर स्टेशन रोड दुर्ग के मंडल ने दूसरा और दिगंबर जैन महिला मंडल बड़ा मंदिर मालवीय मार्ग रायपुर ने तीसरा स्थान हासिल किया।

आरती सजाओ प्रतियोगिता में राखी-रोहित जैन प्रथम

कार्यक्रम में आरती सजाओ प्रतियोगिता भी आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों और महिलाओं ने घर से आरती सजाकर लाए और प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों के आधार पर विभिन्न पुरस्कार दिए गए। धार्मिक गतिविधियों में परिवारों और बच्चों की भागीदारी ने कार्यक्रम को उत्साहपूर्ण बनाया। आरती सजाओ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान राखी रोहित जैन ने प्राप्त किया।

जीवदया के लिए दयोदय महासंघ को मिला अलंकरण

समारोह में ‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण’ से दयोदय महासंघ को जीवदया, गौवंश संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। दयोदय महासंघ के अध्यक्ष प्रेमचंद जैन (प्रेमी), सतना ने सम्मान ग्रहण किया। यह अलंकरण आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के आध्यात्मिक, साहित्यिक और सामाजिक योगदान को स्मरण करने तथा उनके विचारों को अपने कार्यों में उतारने वाली संस्थाओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रदान किया जाता है।दयोदय महासंघ असहाय और निराश्रित गोवंश को आश्रय देने, उनके पालन-पोषण और चिकित्सा की व्यवस्था करने तथा गोशालाओं के संचालन में सहयोग देने के लिए कार्य करता है। सम्मान के माध्यम से जीवदया और प्राणी संरक्षण के प्रति संस्था के समर्पण को सराहा गया।

शरद पूर्णिमा पर दोनों आचार्यों के अवतरण दिवस का महत्व

यह ‘शरदोत्सव’ समाधिस्थ राष्ट्रसंत आचार्यश्री 108 विद्यासागर महाराज और वर्तमान परंपराचार्य आचार्यश्री 108 समयसागर महाराज के अवतरण महापर्व के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। दोनों आचार्यों का अवतरण दिवस शरद पूर्णिमा की पावन तिथि से जुड़ा है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरु-वंदना, पूजन और धार्मिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

कार्यक्रम में सकल दिगम्बर जैन समाज, रायपुर के अध्यक्ष संजय जैन नायक और नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष सूर्यकांत राठौर सहित समाज के अनेक सदस्य मौजूद रहे। मंच संचालन राजेश जैन रज्जन ने किया।

शरदोत्सव को सफल बनाने में विनोद जैन बड़जात्या, भरत जैन भोरावत, प्रभात जैन, नरेंद्र जैन गुरुकृपा, श्रेयस जैन, राजीव जैन, नवीन जैन मोदी, प्रणीत जैन, यशवंत जैन, दिलीप जैन, यश पाटनी, सनत जैन, भरत जैन, जितेंद्र गादिया, श्रद्धेय जैन, शिशिर जैन, मिठालाल जैन, नितिन जैन, शैलेंद्र जैन, शिशिर जैन एवं बंशीलाल जैन सहित अन्य सदस्यों ने सहभागिता निभाई।

चंद्रप्रभ जिनालय में आज होंगे धार्मिक कार्यक्रम

शरदोत्सव के दूसरे दिन सोमवार, 26 अक्टूबर को शंकरनगर स्थित श्रीचंद्रप्रभ जिनालय में सुबह 6:30 बजे जिन अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और आचार्य छत्तीसी विधान होगा। शाम 7 बजे संगीतमय मंगल आरती, भक्ति संगीत और डांडिया का कार्यक्रम रखा गया है।

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