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मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए बढ़ते कदम संस्था के प्रयासों से 19 वर्षों में 225 शरीरदान

रायपुर। बढ़ते कदम संस्था द्वारा मेडिकल पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखने के उददेश्य से वर्ष 2007 में बढ़ते कदम संस्था द्वारा शरीरदान सेवा शुरूआत की गई थी। ‘‘चैरिटी बिगिन्स फ्रॉम होम’’ को चरितार्थ करते हुए शरीरदान सेवा-कार्यो की शुरूआत अपने घर से की। इस सेवा की शुरूआत 16.07.2007 को संस्था बढ़ते कदम के संस्थापक स्व. अनिल गुरूबक्षाणी की माताजी स्व. रूक्मणी देवी गुरुबक्षाणी की पण्डित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर में प्रथम देहदान किया। उसके पहले विगत 50 वर्षो में केवल 5 लोगो ने ही देहदान किया था। मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए संस्था के प्रयासों से 19 वर्षों में 225 शरीरदान संपन्न।

पलाश हाइट्स, महावीर नगर, रायपुर निवासी श्रीमती मुक्ता बेन संघवी का निधन 29/09/2026 हो गया था, उन्होंने अपने जीवन काल में ही चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए अपने देहदान की इच्छा व्यक्त की थी, परिजनों ने उनकी इस इच्छा का सम्मान करते हुए बढ़ते कदम संस्था से संपर्क कर देहदान की प्रक्रिया पूरी की। उनका पार्थिव शरीर श्रीबालाजी मेडिकल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को सौंपा गया।

संघवी परिवार द्वारा लिया गया देहदान का निर्णय अत्यंत साहसिक, मानवीय और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।

बढ़ते कदम संस्था स्व. मुक्ता बेन संघवी को शत् शत् नमन करती है और परिवार को दुख की इस घड़ी में सांत्वना प्रदान करते हुए परिवार को मानव सेवा के इस पुनीत कार्य में योगदान हेतु साधुवाद प्रदान करती है। विशेष सहयोग – राजू झामनानी, बंटी जुमनानी।

शरीरदान प्रभारी एवं मीडिया प्रभारी राजू झामनानी ने बताया कि संस्था के प्रयासो से विगत 18 वर्षो 200 लोगों ने शरीरदान किया है। न केवल रायपुर शहर के चिकित्सा महाविद्यालयों (एम्स, मेकाहारा, रिम्स, बालाजी, श्रीरावतपुरा सरकार, आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक कॉलेज) को 147 शरीर उपलब्ध कराया गया है, बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य के जिलों में जैसे दुर्ग में 15, राजनांदगांव में 15, जगदलपुर बस्तर में 2 व बिलासपुर में 3 के प्रत्येक सरकारी एवं निजी चिकित्सा महाविद्यालयों को शरीर उपलब्ध कराए गए हैं।

संस्था ने छत्तीसगढ़ के बाहर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए अन्य प्रदेशों जैसे मध्यप्रदेश के भोपाल में 13 एवं ओडिशा में 5 पार्थिव शरीर उपलब्ध कराए गया हैं । संस्था भारत के किसी भी प्रदेश में जहां शरीर की कमी है, वहां शरीर उपलब्ध कराने को उत्सुक है। मृत्यु के पश्चात अपने शरीर के ऐसे अंगो का दान, जो किसी अन्य व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित किए जा सकें, ही अंगदान है। वर्तमान में संस्था के पास 350 लोगों ने अपने ‘‘शरीरदान घोेषणा फार्म’’ भरकर जमा करवायें हैं।

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मीडिया एमपीसीजी