रायपुर। आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए शनिवार को साध्वी मंजुलाश्री ने कहा, हमें आत्मा को समझकर संयम, समर्पण और प्रेम के रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन देते हुए कहा कि मनुष्य को यह समझना होगा कि उसका जीवन किस उद्देश्य के लिए हुआ है। केवल संसार की योजनाएं बनाने की बजाय आत्मकल्याण और मोक्ष की दिशा में भी चिंतन जरूरी है। उन्होंने कहा, हमें आत्मा को भूलकर नहीं जीना चाहिए और संसार की उलझनों में इतना नहीं फंसना चाहिए कि अपने वास्तविक स्वरूप को ही भूल जाएं। स्वयं को समझना मोक्ष प्राप्ति की दिशा में पहला कदम है। व्यक्ति दिनभर चिंतन करता है, लेकिन जिस विषय पर वास्तव में चिंतन करना चाहिए, उस पर ध्यान नहीं देता। व्यर्थ के चिंतन से मन अशांत होता है, जबकि अध्यात्म में रमने से जीवन में व्यापकता आती है। इस अवसर पर श्रीऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदमुथा, राजेंद्र गोलछा व उज्ज्वल झाबक सहित चातुर्मास समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी, सहसचिव अभिषेक गोलछा व कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।




