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विजय संचेती ने किया 30 दिनों का निराहारी तप ‘मासखमण’

रायपुर। पंचशील नगर निवासी ‘तपस्वी रत्न’ सुश्रावक विजय संचेती ने नेपाल केसरी, राष्ट्र संत मणिभद्र मुनि के आशीर्वाद से एक माह अर्थात् 30 दिनों का निराहारी उपवास ‘मासखमण’ शुक्रवार को पूर्ण किया। उनके इस कठिन तप की निरंतरता और साधना के प्रति समर्पण ने समाज के लोगों को प्रेरित किया है। समाज के वरिष्ठ सदस्य विनय पटवा ने बताया कि श्री संचेती पिछले 32 वर्षों से हर वर्षावास चातुर्मास पर लगातार मासखमण की तपस्या करते रहे हैं। इस वर्ष उनका यह 33वां मासखमण तप है। जैन समाज में मासखमण को अत्यंत कठिन एवं विशिष्ट तपस्या माना जाता है। इसमें साधक पूरे एक माह तक अन्न एवं अन्य खाद्य पदार्थों का पूर्ण त्याग करते हुए केवल गर्म जल का सेवन कर निराहार उपवास करता है। तपस्वी संचेती के 33वें मासखमण तप का पारणा कुम्हारी स्थित कैवल्य धाम में बस्तर प्रहरी संतश्री राजेश महाराज के पावन सान्निध्य में हुआ। इस अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालुओं व गणमान्य जनों ने तपस्वी संचेती का अभिनंदन तथा उनके तप की अनुमोदना की।

 

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