रायपुर

वर्धमान नगर जिनालय में 9 दिवसीय आराधना शुरू

मंदिर जाना और प्रवचन सुनना ही धर्म नहीं, उसे जीवन में उतारना जरूरी: मुनि श्री शाश्वत रत्न सागरजी

रायपुर। श्रीवर्धमान नगर जिनालय में रविवार से श्रीशाश्वत नवपद ओली आराधना शुरू हुई। नौ दिवसीय यह आराधना 26 अक्टूबर तक चलेगी। यहां खरतरगच्छाचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वर महाराज के शिष्य मुनिश्री शाश्वत रत्न सागर महाराज एवं मुनिगणों की पावन निश्रा में श्रद्धालु नवपद की आराधना और तप-साधना कर रहे हैं।

आराधना के पहले दिन प्रवचन में मुनिश्री शाश्वत रत्न सागरजी म.सा. ने धर्म के वास्तविक स्वरूप, आस्तिकता और व्यसन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धर्म तो सभी करना चाहते हैं, लेकिन धर्म को समझकर उसकी वास्तविकता को जानने और उसे आचरण में उतारने का प्रयास कम लोग करते हैं। कई लोग मंदिर जाकर और प्रवचन सुनकर लौटने को ही धर्म मान लेते हैं, जबकि धर्म का वास्तविक उद्देश्य उसके सिद्धांतों को समझकर जीवन में अपनाना है।

मुनि श्री ने आस्तिकता के वास्तविक अर्थ को समझाते हुए कहा कि केवल भगवान की पूजा करना ही पर्याप्त नहीं है। धर्म के प्रति व्यक्ति की समझ, उसके विचार और आचरण भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने नास्तिकता के संदर्भ में कहा कि जो आत्मा, पाप-पुण्य, कर्म सिद्धांत और स्वर्ग-नरक को नहीं मानता, उसे नास्तिक कहा जाता है।

उन्होंने व्यसन के व्यापक अर्थ पर भी प्रकाश डाला। मुनि श्री ने कहा कि सामान्य तौर पर व्यसन का संबंध मादक पदार्थों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन व्यक्ति कई दूसरी आदतों का भी गुलाम बन सकता है। एसी की हवा के बिना नहीं रह पाना, पैसे कमाने की अत्यधिक लालसा, दिन में आराम करने की आदत, मेकअप और चटपटे भोजन की लत भी ऐसी निर्भरता का रूप ले सकती हैं। व्यक्ति को अपनी आदतों को पहचानकर उन पर संयम रखना चाहिए।

नवपद ओली जैन धर्म की महत्वपूर्ण नौ दिवसीय साधना है। इसमें सिद्धचक्र के नौ पदों की आराधना की जाती है। इनमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु के साथ सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यक्चारित्र एवं सम्यक्तप शामिल हैं। इस दौरान साधक आयंबिल तप सहित निर्धारित नियमों का पालन करते हुए स्वाद और इंद्रियों पर संयम रखने का प्रयास करते हैं। जैन परंपरा में इस साधना को आत्मशुद्धि और कर्म निर्जरा का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है।

मेघराज बेगानी धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट के अध्यक्ष धर्मराज बेगानी ने बताया कि ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस आराधना में श्रद्धालु धार्मिक गतिविधियों और तप-साधना में भाग ले रहे हैं।

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