रायपुर। विवेकानंद नगर स्थित श्रीज्ञानवल्लभ उपाश्रय में सर्वमंगलमय वर्षावास के तहत जारी नव दिवसीय शाश्वत नवपद ओली की आराधना के क्रम में 6वें दिन शुक्रवार को सम्यग् दर्शन पद की आराधना की गई। धर्मसभा में मुनिश्री संवेगरत्न सागर महाराज ने सम्यग् दर्शन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके बिना ज्ञान भी मिथ्या कहलाता है और धार्मिक क्रियाएं सार्थक नहीं होतीं। सम्यग् दर्शन ही मोक्ष मार्ग की आधारशिला है।
मुनिश्री ने कहा कि सम्यग् दर्शन का अर्थ विचारों का शुद्धिकरण,अध्यवसायों का निर्मलीकरण और भावनाओं का उर्ध्वीकरण है। इससे संसार के प्रति मोह कम होता है और संयम, त्याग व धर्म की भावना विकसित होती है। सम्यग् दर्शन की प्राप्ति के बाद ही मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है। जिस प्रकार नींव के बिना भवन का टिकना संभव नहीं है, उसी प्रकार सम्यग् दर्शन के बिना आध्यात्मिक प्रगति नहीं हो सकती।
धर्म तत्व की आराधना शुरू
नवपद ओली के पहले पांच दिनों में देव और गुरु तत्व अर्थात् अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधु पद की आराधना की गई। छठवें दिन से धर्म तत्व की आराधना शुरू हुई। धर्म तत्व का पहला पद सम्यग् दर्शन है। मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को देव, गुरु और धर्म के प्रति सम्यक श्रद्धा बनाए रखने का संदेश दिया।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया और महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि आयोजन के तहत 80 श्रावक प्रतिदिन आयम्बिल तप कर रहे हैं। इस तप में साधक दिन में एक बार, एकासना करते हैं। बिना मसाले और खटाई के भोजन में तेल, घी, दूध, दही, मक्खन और शक्कर सहित छह विगय का त्याग होता है। चातुर्मास के दौरान आत्मशुद्धि के लिए तप और आराधना का क्रम जारी है।