धार्मिक मान्यता: अच्छी वर्षा, अच्छी फसल का है यह संकेत
भक्तों के रोग-दोष होंगे दूर
आदिशक्ति मां के मंदिरों में जलेगी ज्योत
बाजे-गाजे के साथ पंडालों में पहुंची माता की मूर्तियां
रायपुर। शारदीय नवरात्रि की शुरूआत रविवार, 11 अक्टूबर से होने जा रही है। इस बार माता हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि रविवार के दिन से हो रही है इसलिए माता की सवारी हाथी होगी। हिंदू धर्म में हाथी को संपन्नता, जल और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक-पौराणिक मान्यतानुसार हाथी पर माता के सवार होकर आना अच्छी वर्षा और अच्छी फसल होने का संकेत होता है। इसके साथ ही वातावरण में भी शुद्धता आती है और भक्तों के रोग-दोष भी दूर होते हैं। आदिशक्ति मां जगदम्बा की नौ दिवसीय आराधना-पूजन के पर्व का शुभारंभ शुभ मूहुर्त में अखंड मनोकामना ज्योति कलशों की स्थापना अर्थात् घट स्थापना से होगा। नौ दिवसीय भक्ति महोत्सव के लिए विभिन्न स्थानों पर रास गरबा व डांडियां उत्सव की तैयारी भी की जा चुकी हैं।
भक्तों के जीवन में आएंगे आर्थिक स्थिरता के अवसर: पं. सत्यम मिश्रा
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर यदुवंशी चौक हीरापुर के पंडित व युवा ज्योतिषाचार्य सत्यम मिश्रा ने बताया, नवरात्रि में माता के हाथी पर सवार होकर आने से देश-दुनिया में शांति और स्थिरता आ सकती है। माता का हाथी पर बैठकर आना धन, वैभव और समृद्धि का प्रतीक भी है। इसलिए शारदीय नवरात्रि के बाद लोगों के जीवन में भी आर्थिक स्थिरता आ सकती है। रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।
गजकेसरी व शशक राजयोग का दुर्लभ संयोग: डॉ. राजेश्वरानंद
श्रीसुरेश्वर महादेव पीठ के संस्थापक व ज्योतिषाचार्य डॉ. स्वामी राजेश्वरानंद ने बताया, शारदीय नवरात्रि पर ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार पहले दिन गजकेसरी और शशक राजयोग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह सुख-समृद्धि कारक माना गया है। 19 अक्टूबर को महाअष्टमी व महानवमी का विशेष संयोग है। विजयादशमी-दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
नौ दिनों तक क्रमश: इन माताओं का करें ध्यान: पं. मनोज शुक्ला
आदिशक्ति पीठ मां महामाया मंदिर पुरानी बस्ती के पंडित व ज्योतिषाचार्य पं. मनोज शुक्ला ने बताया, नवरात्रि का पर्व शक्ति और भक्ति का बहुत बड़ा पर्व है। नवरात्रि पर्व पर मां जगदम्बा की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति आरोग्यता के लिए प्रार्थना करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अलग-अलग तिथियों में माता के अलग-अलग स्वरूपों का ध्यान कर, पूजा-आराधना कर श्रद्धानुसार भोग लगाना चाहिए। नवरात्रि की 9 तिथियों में मुख्य रूप से भगवती के नौ स्वरूप क्रमश: सर्वश्री मां शैलपुत्री, ब्रम्हचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री को ही मुख्य रूप मानकर भक्ति आराधना की जाती है।
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घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
श्रीशंकराचार्य आश्रम बोरियाकला के प्रमुख आचार्य एवं ज्योतिषाचार्य दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद तीर्थ महाराज के अनुसार शारदीय नवरात्रि पर घट स्थापना के शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे-
प्रात: काल मुहूर्त: सुबह 7:45 से सुबह 12:06 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक।
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मां महामाया मंदिर में प्रज्ज्वलित होंगी 11,000 से अधिक अखंड ज्योतियां
पुरानी बस्ती स्थित श्रीराज राजेश्वरी महामाया माता मंदिर में इस शारदीय नवरात्रि पर 11 हजार से अधिक मनोकामना ज्योति प्रज्ज्वलित होंगी। मंदिर के व्यवस्थापक पं. विजय कुमार झा ने बताया, मंदिर में अखंड ज्योति कलश स्थापना के लिए शनिवार शाम तक 11 हजार पंजीयन दर्ज हो चुके थे। इसके अतिरिक्त मंदिर में 164 आजीवन ज्योतियां और 7 राज ज्योति कलश पर स्थापित किए जाएंगे। मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष व्यास नारायण तिवारी, सचिव दुर्गा प्रसाद पाठक, कोषाध्यक्ष सत्यनारायण अग्रवाल,वरिष्ठ सदस्य शेखर दुबे की उपस्थिति में शनिवार को मंदिर में आपात बैठक हुई, जिसमें यह निर्णय लिया गया है कि इसके बाद ज्योति कलशों के लिए पंजीयन बंद किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 11 हजार से अधिक ज्योति कलशों की व्यवस्था करने लगभग डेढ़ सौ सैवकों की आवश्यकता होती है। साथ ही उनके रहने-खाने संपूर्ण व्यवस्था मंदिर द्वारा की जाती है। इसलिए इससे अधिक ज्योति के लिए मंदिर में स्थान व व्यवस्था न होने के कारण पूर्व से ही अधिकतम 11 हजार मनोकामना ज्योति प्रज्वलित किए जाने की व्यवस्था रखी गई है।
भक्तों को निराश न करते हुए ट्रस्ट ने यह निर्णय भी लिया कि वे मंदिर में स्थापित अखंड ज्योति कलशोें में तेल भरने के लिए 5 लीटर तेल देकर या कन्या भोज, ब्राह्मण भोज, भंडारा के लिए दानराशि देकर भी अपनी मनोकामना सिद्धी के लिए माता की भक्ति और प्रार्थना से जुड़ सकते हैं।