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शारदीय नवरात्रि: इस बार अष्टमी पूजन कहीं रविवार को तो कहीं सोमवार को

शंकराचार्य आश्रम प्रमुख डॉ. इंदुभवानंद ने कहा- अष्टमी रविवार को मनाएं, यही सकला तिथि है

उदया तिथि की मान्यतानुसार कुछ मंदिरों में नवमी व कन्या पूजन मंगलवार को

रायपुर। नवरात्रि में जहां देवी के पूजा-पाठ और उपवास का महत्व होता है, तो वहीं कन्या पूजन भी महत्वपूर्ण माना गया है। नवरात्रि के अंतिम दिनों में साधक द्वारा कन्या पूजन किया जाता है, जिसके बाद व्रती अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व जारी है और इन 9 दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर उपवास रखते हैं। वहीं, व्रत का पारण नवरात्रि के अंतिम दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन के साथ किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के इन दिनों मां दुर्गा की पूजा करने के साथ कन्या पूजन और कन्या भोज कराने का विशेष महत्व होता है। इस दौरान कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना की जाती है। कुछ लोग अष्टमी, तो कुछ नवमी तिथि पर कन्या पूजन करते हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। इस दौरान कुछ स्थानों पर 19 अक्टूबर को ही नवमी मनाई जाएगी। हालांकि, उदयातिथि के आधार पर पूजा करने वाले श्रद्धालु 20 अक्टूबर को कन्या पूजन कर सकते हैं।

ऐसे में वर्ष-2026 में अष्टमी और नवमी किस दिन मनाई जाएगी और कन्या पूजन के लिए कौन-सा समय शुभ रहेगा, इसके बारे में नगर के प्रमुख ज्योतिषाचार्यों व धर्मशास्त्रियों के मत इस प्रकार हैं-

महाअष्टमी 18 को व नवमी 19 को मनाई जानी चाहिए: डॉ. इंदुभवानंद

श्रीशंकराचार्य आश्रम बोरियाकला के प्रमुख आचार्य एवं ज्योतिषाचार्य दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद तीर्थ महाराज ने बताया, इस वर्ष तिथि की वृद्धि हुई है, कहीं-कहीं किन्ही-किन्ही पंचांगों में सप्तमी तिथि की और किन्ही पंचांगों में अष्टमी तिथि की वृद्धि प्राप्त हो रही है। तथापि आश्विन शुक्ल अष्टमी रविवार, 18 अक्टूबर को महाष्टमी, गौरी व्रत मनाया जाएगा, महानिशां का पूजन भी इसी दिन किया जाएगा। आश्विन शुक्ल अष्टमी व नवमी सोमवार, 19 अक्टूबर को महानवमी का पूजन किया जाएगा। और विजयादशमी के संबंध में निर्णय प्राप्त होता है कि आश्विन शुक्ल नवमी मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन विभिन्न व्रत का पारणा करना चाहिए। 20 अक्टूबर को प्रात: 8 घटी 7 पल अर्थात् प्रात: 9 बजकर 34 मिनट पर दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो श्रवण नक्षत्र से युक्त रहेगी। श्रवण नक्षत्र से युक्त दशमी को विजय यात्रा करने का बड़ा महत्व माना जाता है। यह दशमी तिथि विजय पर्व से युक्त है, अत: विजयादशमी पर्व 20 अक्टूबर को ही मनाना चाहिए।

महामाया मंदिर में अष्टमी पूजन 19 को व नवमी 20 अक्टूबर को

पुरानी बस्ती स्थित प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ श्रीमां महामाया मंदिर में रविवार, 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि मान्य करते हुए महानिशा पूजन होगा। श्री मां समलेश्वरी मंदिर के पुजारी व ज्योतिषाचार्य पं. मनोज शुक्ला ने बताया, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन सोमवार,19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाई जाएगी।

स्थानीय काल व घटी मुहूर्त एवं उदया तिथि के अनुसार सोमवार, 19 अक्टूबर को प्रात: 9 बजे से अष्टमी पूजन व प्रात: 10 बजे से हवन प्रारंभ होगा एवं रात्रि में ज्योति विसर्जन किया जाएगा। अगले दिन मंगलवार, 20 अक्टूबर को नवमी-विजयादशमी, कन्या भोज के उपरांत राजभोग भंडारा के अनुष्ठान होंगे।

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

अष्टमी तिथि पर अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक बताया जा रहा है। इस अवधि में मां दुर्गा की पूजा और कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है। नवमी पर कन्या पूजन करने वाले भक्त 19 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक पूजा कर सकते हैं। वहीं, 20 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक बताया जा रहा है। इस दौरान मां दुर्गा की आराधना करने और कन्याओं का पूजन करने की परंपरा निभाई जा सकती है।

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